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कोरोना महामारी के चलते देश के 50 फीसदी छात्रों में तनाव, नहीं लग रहा पढ़ाई में मन

April 29, 2022 07:03 AM

चंडीगढ़ (सोनिया अटवाल) - कोरोना के चलते बच्चों की मानसिक स्थिति पर सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ा है। यूनिसेफ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, महामारी के कारण देश के 50 प्रतिशत बच्चे तनाव के कारण किसी न किसी मानसिक विकार से ग्रस्त हुए हैं। ऐसे में एक बार फिर देशभर में कोरोना के मामले लगातार बढऩे के बाद चंडीगढ़ में भी हर रोज नए मरीज आने लगे हैं। ऐसे में पेरेंटस की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि कोविड की वजह से लंबे समय तक लॉकडाउन में बच्चों को घरों में बंद रहना पड़ा। जिससे ऑनलाइन रहने के कारण बच्चों में डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन और कम बोलने जैसी समस्या हो रही है। पीजीआई चंडीगढ़ के साइकेट्री विभाग की डा. निधी चौहान का कहना है कि बच्चों का पढ़ाई-लिखाई में मन नहीं लग रहा है। बच्चों में डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, गुस्सा और खामोशी जैसी समस्या आने लगी है। जोकि चिंता का विषय है।

ध्यान रहे कि इन दिनों सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं शुरू हो गई है। ऐसे में बच्चों को पढ़ाई में अधिक ध्यान लगाने की जरूरत है। इसीलिए पीजीआई की ओर से अभिभावकों को यह टिप्स दिए गए हैं कि अगर आपका बच्चा स्कूल या कॉलेज जाता है और उसमें डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, चुप रहना और पढ़ाई-लिखाई में मन नहीं लगने की समस्या आ रही है तो पीजीआई ने ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों को समय देने के लिए कहा है।

पीजीआई में हर हफ्ते रहे तीन से चार मामले:

पीजीआई चंडीगढ़ में हर हफ्ते ऐसे तीन से चार मामले सामने आ रहे हैं। जहां अभिभावक अपने बच्चों के साथ पीजीआई के साइकेट्री विभाग में डिप्रेशन, गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन और खामोश रहने की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। ऐसे में बच्चों के साथ अभिभावकों की काउंसलिंग की जा रही है, ताकि लंबे समय तक ऑन स्क्रीन की वजह से बच्चों के मानसिक विकास पर जो बुरा असर पड़ा है, उसे काउंसलिंग के जरिए ठीक किया जा सके। डा. निधी ने कहा देखने में आया है कि कोविड के दौरान छह से लेकर 18 साल तक के 50 से 60 फीसद बच्चों के मानसिक विकास पर इसका असर पड़ा है। इसके लिए अभिभावक चाहें तो पीजीआइ के साइकेट्री विभाग से संपर्क कर सकते है।

ऑनलाइन की वजह से बच्चों के मानसिक विकास पर पड़ा असर:

डॉक्टर्स के मुताबिक बच्चों के व्यवहार में आए बदलाव की एक वजह यह भी है कि लॉकडाउन में घर के अंदर रहने को मजबूर बच्चों का अधिकतर समय मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी पर गुजरा। मोबाइल और लैपटॉप पर दिनभर सोशल मीडिया और गेम्स खेलने और टीवी देखकर पर अपना समय बीताने की वजह से बच्चों के मानसिक विकास पर इसका बुरा असर पड़ा है। यह कहना है । डॉक्टर निधी चौहान ने बताया लॉकडाउन में ऑन स्क्रीन पर लंबे समय तक रहने की वजह से बच्चों के मानसिक विकास पर प्रभाव पड़ा है। अनलॉक की प्रक्रिया के बाद अब स्कूल खुल गए हैं। बच्चे अब स्कूल जाने लगे हैं तो ऑन स्क्रीन का असर सामने आने लगा है।

बच्चों में डिप्रेशन की समस्या दूर करने के तरीके:

- बच्चों के साथ समय बिताएं।

- बच्चों से पारिवारिक और उनके फ्रेंड सर्कल को लेकर बात करें।

- बच्चों की स्कूल लाइफ को अभिभावक अपने साथ शेयर करें।

- बच्चों को ऑन स्क्रीन और सोशल मीडिया से कुछ समय के लिए दूर रखें।

- अभिभावकों को अपने बच्चों को उनके दोस्तों के साथ खेलने और उनके साथ समय बीताने का मौका दें।

- बच्चों को दोबारा पढ़ाई-लिखाई की ओर रुझान लाने के लिए उनके साथ सीटिंग दें

 
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