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हिमाचल में 10 सरकारी कॉलेजों का जिला मुख्यालय के महाविद्यालय में मर्ज , छात्रों को मिलेगा ₹5000 स्टाइपेंड

VVinita Kohli
हिमाचल में 10 सरकारी कॉलेजों का जिला मुख्यालय के महाविद्यालय में मर्ज , छात्रों को मिलेगा ₹5000 स्टाइपेंड
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों के पुनर्गठन के तहत कम छात्र संख्या वाले 10 सरकारी डिग्री कॉलेजों को नजदीकी जिला मुख्यालय स्थित महाविद्यालयों में मर्ज करने का फैसला लिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने शुक्रवार देर शाम इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए। सरकार का कहना है कि इस कदम से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही प्रभावित विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ₹5000 मासिक स्टाइपेंड देने की भी घोषणा की गई है।

किन कॉलेजों का किया गया विलय

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सरकार के आदेश के अनुसार टिक्कर, भलेई, कुकुमसेरी, कुपवी, संधोल, मुल्थान, जैनगर, ननखड़ी, रोनहाट और कोटली सरकारी डिग्री कॉलेजों को जिला मुख्यालय स्थित कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन संस्थानों में प्रथम वर्ष सहित किसी भी कक्षा में नए प्रवेश नहीं लिए जाएंगे। संबंधित कॉलेजों के मौजूदा विद्यार्थियों को निर्धारित सरकारी महाविद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे कम छात्र संख्या वाले संस्थानों के संचालन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान हो सकेगा।

सरकार ने कॉलेज विलय के साथ विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता देने का भी निर्णय लिया है। आदेश के अनुसार जिन छात्रों को सरकार द्वारा निर्धारित मर्ज किए गए कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा और जो वहीं अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे, उन्हें ₹5000 प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा। हालांकि यह सुविधा केवल उन्हीं विद्यार्थियों को मिलेगी जो सरकार द्वारा तय संस्थानों में प्रवेश लेंगे। यदि कोई छात्र अपनी पसंद के किसी अन्य कॉलेज में दाखिला लेता है, तो वह इस स्टाइपेंड का पात्र नहीं होगा। सरकार का कहना है कि यह सहायता छात्रों के आवागमन और अन्य खर्चों को ध्यान में रखकर दी जा रही है।

प्राचार्यों को काउंसलिंग के निर्देश

उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. हरीश कुमार ने सभी संबंधित कॉलेज प्राचार्यों को विशेष निर्देश जारी किए हैं। दूसरे और तीसरे वर्ष के विद्यार्थियों की काउंसलिंग कर उन्हें नए संस्थानों में प्रवेश, दस्तावेजी प्रक्रिया और अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी देने को कहा गया है। विभाग चाहता है कि स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसी उद्देश्य से कॉलेज प्रशासन को विद्यार्थियों और अभिभावकों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सरकार के इस निर्णय को लेकर कई स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं। अब तक छात्र अपने घरों के पास स्थित कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन विलय के बाद उन्हें जिला मुख्यालय या अन्य निर्धारित संस्थानों में जाना होगा। आलोचकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को किराया, आवास, भोजन और दैनिक खर्चों पर अतिरिक्त रकम खर्च करनी पड़ेगी। ऐसे में ₹5000 मासिक स्टाइपेंड पर्याप्त होगा या नहीं, इस पर भी चर्चा शुरू हो गई है। कई अभिभावकों का मानना है कि शिक्षा की लागत पहले की तुलना में बढ़ सकती है।

कुकुमसेरी के छात्रों पर सबसे अधिक असर

लाहौल-स्पीति जिले के कुकुमसेरी कॉलेज के विद्यार्थियों पर इस फैसले का अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। अब इन छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए कुल्लू स्थित कॉलेजों में जाना होगा। भौगोलिक परिस्थितियों और लंबी दूरी को देखते हुए यह बदलाव कई परिवारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि इन कॉलेजों के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए भवनों और बुनियादी ढांचे का भविष्य क्या होगा। कई लोगों का मानना है कि इन परिसरों के उपयोग को लेकर सरकार को स्पष्ट योजना सामने रखनी चाहिए।

सरकार इस कदम को उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जोड़कर देख रही है। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी आवाजें और कुछ शिक्षा विशेषज्ञ इसे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की पहुंच पर असर डालने वाला निर्णय मान रहे हैं। फिलहाल उच्च शिक्षा विभाग ने विलय प्रक्रिया को लागू करने की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह पुनर्गठन विद्यार्थियों के लिए कितना लाभकारी साबित होता है और सरकार को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

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