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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 85 लाख की ठगी, चंडीगढ़ साइबर पुलिस ने इंदौर निवासी आरोपी को दबोचा

VVinita Kohli
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 85 लाख की ठगी, चंडीगढ़ साइबर पुलिस ने इंदौर निवासी आरोपी को दबोचा
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चंडीगढ़: यूटी पुलिस के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने डिजिटल ठगी के एक गंभीर मामले में कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 9 दिसंबर को दर्ज एफआईआर के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 308(2), 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के अंतर्गत की गई है।

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पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान अंकित गुप्ता (34 वर्षीय), इंदौर (मध्य प्रदेश) निवासी, के रूप में हुई है। मामले में शिकायतकर्ता, जो चंडीगढ़ का निवासी है, को खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक और विजिलेंस विभाग का अधिकारी बताने वाले अज्ञात लोगों के फोन आए। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले में “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया और तथाकथित “प्रायोरिटी इनोसेंस सर्टिफिकेट” दिलाने के नाम पर रकम ट्रांसफर करवाई। इस तरह शिकायतकर्ता से कुल 85 लाख रुपये की ठगी की गई।

इंदौर में छापा मारकर आरोपी को दबोचा

जांच में सामने आया कि 39 लाख और 11 लाख रुपये की दो बड़ी रकम बैंक ऑफ बड़ौदा के एक खाते में जमा हुईं, जो आरोपी के नाम पर थी। वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बाद इंदौर में छापा मारकर 20 दिसंबर को आरोपी को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से संबंधित बैंक खाते की चेकबुक भी बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आगे की पूछताछ में डिजिटल उपकरणों की जांच, धन के लेन-देन की कड़ी और अन्य आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।

जनता के लिए पुलिस की सलाह

  • कोई भी पुलिस, सीबीआई या ईडी अधिकारी फोन या व्हाट्सऐप पर पैसे या निजी जानकारी नहीं मांगता। पार्सल में ड्रग्स या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े ऐसे किसी भी कॉल को फर्जी समझें।
  • वीडियो कॉल पर दिखाए जा रहे फर्जी गिरफ्तारी वारंट या अधिकारियों पर भरोसा न करें।
  • सत्यापन, गिरफ्तारी से बचने या किसी झूठे मामले को निपटाने के नाम पर कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें।
  • अपने नाम पर कितने सिम कार्ड जारी हैं, इसकी जांच आधिकारिक पोर्टल (जैसे भारत में टैफकॉप) पर करें और किसी अज्ञात नंबर की तुरंत रिपोर्ट करें।
  • व्हाट्सऐप की प्राइवेसी सेटिंग बदलकर अनजान कॉल को ब्लॉक करें।
  • किसी भी संदिग्ध कॉल की पुष्टि स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क कर करें।
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