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पीयू में भारतीय भाषा परिवार और नई शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को भारतीय ज्ञान परंपरा का दस्तावेज बताया

VVinita Kohli
पीयू में भारतीय भाषा परिवार और नई शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को भारतीय ज्ञान परंपरा का दस्तावेज बताया
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चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग की ओर से शुक्रवार को ‘भारतीय भाषा परिवार: भारतीय भाषाओं के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुस्तक परिचर्चा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। उद्घाटन सत्र में हिंदी विभाग के अध्यक्ष एवं संगोष्ठी संयोजक प्रो. अशोक कुमार और संकाय सदस्य प्रो. बैजनाथ प्रसाद व डॉ. विनोद कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. अमित चौहान (अधिष्ठाता छात्र कल्याण, पंजाब विश्वविद्यालय) उपस्थित रहे। बीज वक्ता के रूप में प्रो. परमेश्वरी शर्मा (सेवानिवृत्त प्रोफेसर, जम्मू विश्वविद्यालय) और विशिष्ट अतिथि के रूप में बलजिंदर सिंह खैरा (वरिष्ठ स्थायी वकील, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय) ने भाग लिया।

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मातृभाषा को अपनाने पर जोर

मुख्य अतिथि प्रो. अमित चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मातृभाषा को आत्मविश्वास के साथ अपनाने और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने पर बल देती है। वहीं बीज वक्ता प्रो. परमेश्वरी शर्मा ने कहा कि यह नीति केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का घोषणापत्र है। विशिष्ट अतिथि बलजिंदर सिंह खैरा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी और व्यावहारिक क्रियान्वयन ही एक समावेशी और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

तकनीकी सत्र और पुस्तक परिचर्चा

इसके बाद तकनीकी सत्र एवं पुस्तक परिचर्चा आयोजित की गई। इस दौरान भारतीय भाषा समिति, भारत सरकार द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘भारतीय भाषा परिवार’ पर विस्तार से चर्चा हुई। विशिष्ट वक्ता डॉ. निर्मला निठारवाल (डीएवी कॉलेज, अबोहर), डॉ. अश्विनी शांडिल्य (डाइट, पंचकूला), डॉ. विनोद कुमार (पंजाब विश्वविद्यालय) और डॉ. पान सिंह (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला) ने पुस्तक की विषयवस्तु और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. गुरपाल सिंह संधू ने कहा कि भाव भाषा का सबसे बड़ा गुण है, और राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में निहित इस भाव का संरक्षण और विस्तार करना है।

समापन सत्र में समसामयिक मुद्दों पर चर्चा

समापन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. कश्मीर सिंह (सह-अधिष्ठाता छात्र कल्याण), विशिष्ट अतिथि डॉ. मोहन लाल जाट (पीजीजीसीजी-11) और विशिष्ट वक्ता डॉ. कशमीरी लाल (डीएवी कॉलेज, सेक्टर-10) ने भाषा, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षा और रोजगार जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी संयोजक प्रो. अशोक कुमार ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। संगोष्ठी में शोधार्थियों और प्रतिभागियों द्वारा शोध पत्र भी प्रस्तुत किए गए।

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