Akshaya Tritiya का पर्व हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-NCR समेत पूरे उत्तर भारत में विशेष आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी सोना खरीदना शुभ माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन किया गया हर कार्य अक्षय फल देता है। पानीपत, करनाल और सोनीपत जैसे शहरों में भी ज्वेलरी बाजारों में इस दिन खास रौनक देखने को मिलती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन खरीदा गया सोना सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि घर में सुख-समृद्धि का प्रतीक बनता है। इसलिए लोग इसे मां लक्ष्मी का स्वरूप मानकर घर लाते हैं और पूरे विधि-विधान से पूजन करते हैं।
अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की परंपरा क्यों खास है
इस दिन को समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि स्वर्ण भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को प्रिय है, इसलिए इसे शुभ भाव से खरीदने पर आर्थिक उन्नति के योग बनते हैं।
यही वजह है कि आम लोग इस दिन छोटी से छोटी खरीदारी भी शुभ मानते हैं। कई परिवारों में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
सोना खरीदने के बाद क्या करें
धार्मिक परंपरा के अनुसार, सोना खरीदते समय मन में सकारात्मक भाव रखना जरूरी माना गया है। इसे घर लाने के बाद सीधे पहनने के बजाय पूजा स्थान में रखना चाहिए।
लाल या पीले कपड़े पर स्वर्ण आभूषण स्थापित कर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का स्मरण किया जाता है। इसके बाद हल्दी, कुंकुम, अक्षत और फूल अर्पित कर दीपक जलाया जाता है।
पूजा की सही प्रक्रिया और मंत्र
पूजा करने से पहले स्नान कर साफ वस्त्र पहनना जरूरी माना गया है। स्वर्ण आभूषण को गंगाजल या स्वच्छ जल से शुद्ध कर उस पर हल्दी और चंदन का तिलक लगाया जाता है।
इसके बाद “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करते हुए भगवान को नैवेद्य अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि पहले भगवान को अर्पित करने के बाद ही आभूषण धारण करना शुभ फल देता है।
आभूषण पहनने और उपहार देने का महत्व
नया आभूषण पहनते समय भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है। खासकर महिलाएं अगर इस दिन मंगलसूत्र, अंगूठी या कंगन धारण करती हैं, तो इसे वैवाहिक सुख और सौभाग्य से जोड़ा जाता है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, पति द्वारा पत्नी को स्वर्ण आभूषण उपहार में देना भी शुभ माना गया है। इससे परिवार में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।
स्वर्ण दान का भी है विशेष महत्व
अक्षय तृतीया पर स्वर्ण या स्वर्ण के समान वस्तु का दान करना पुण्यकारी माना जाता है। जरूरतमंद को दान देने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य आने की मान्यता है।
इस दिन खरीदा गया सोना संभालकर रखने की परंपरा है, क्योंकि इसे खोना अशुभ माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया पूजन घर में स्थायी खुशहाली से जोड़ा जाता है।

