September 21, 2026

Ambala News: अंबाला के छोरे का न्यूजीलैंड में जलवा, राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में जीता गोल्ड, पिछले साल मिला था सिल्वर

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Ambala News: अंबाला के छोरे का न्यूजीलैंड में जलवा, राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में जीता गोल्ड, पिछले साल मिला था सिल्वर

अंबाला के छोरे का न्यूजीलैंड में जलवा, राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में जीता गोल्ड

Ambala News: जिस खेल का जुनून बचपन में अंबाला की तंग गलियों और स्कूल के मैदान से शुरू हुआ था, उसी जुनून ने आज सात समंदर पार भारत का परचम लहरा दिया है। अंबाला कैंट के (Ambala Cantt Lalkurti) लालकुर्ती इलाके के रहने वाले पवन दीप सिंह ने न्यूजीलैंड की धरती पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक (New Zealand National Wushu Championship) पर कब्जा जमाया है। ऑकलैंड के (Wushu Kung Fu Federation of New Zealand) प्रतिष्ठित नैटबॉल स्टेडियम में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मिली इस बड़ी कामयाबी के बाद न केवल पवन का परिवार गदगद है, बल्कि पूरे अंबाला और हरियाणा (Haryana Wushu Players) में खुशी की लहर दौड़ गई है।

ऑकलैंड में गूंजा हरियाणा का नाम, सिल्वर को गोल्ड में बदला

यह प्रतियोगिता ‘वुशू कुंग फू फेडरेशन ऑफ न्यूजीलैंड’ की ओर से आयोजित की गई थी, जिसमें देश-विदेश के कई धाकड़ खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। पवन दीप सिंह के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। पिछले साल भी उन्होंने इसी राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था, लेकिन तब उन्हें रजत पदक (सिल्वर मेडल) से ही संतोष करना पड़ा था। हालांकि, पवन ने हार नहीं मानी और अपनी कमियों पर काम करते हुए इस बार मेडल का रंग बदलकर सोने में तब्दील कर दिया। उनकी इस स्वर्णिम सफलता की खबर मिलते ही अंबाला स्थित उनके पैतृक घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

बचपन से ही था मार्शल आर्ट्स का जुनून, पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी पिता बने प्रेरणा

अपनी सफलता का श्रेय परिवार को देते हुए पवन दीप सिंह बताते हैं कि खेलों के प्रति उनका लगाव बहुत ही छोटी उम्र में शुरू हो गया था। महज छह साल की उम्र से ही वे मार्शल आर्ट्स और खेलों की तरफ आकर्षित होने लगे थे। परिवार ने भी बेटे के इस हुनर को पहचाना और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। पवन के पिता, जो बैंकिंग क्षेत्र में सेवाएं दे चुके हैं, खुद भी अपने समय में फुटबॉल के बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं। पिता के खेल पृष्ठभूमि से होने के कारण पवन को घर में ही खेल भावना और कड़ा अनुशासन सीखने को मिला, जिसकी बदौलत आज वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं।

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