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आवारा कुत्तों को ‘अवैध’ रूप से हटाने के खिलाफ पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

VVinita Kohli
आवारा कुत्तों को ‘अवैध’ रूप से हटाने के खिलाफ पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
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नई दिल्ली: आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े निर्देशों के विरोध में शनिवार को सैकड़ों लोग जानवरों के चित्र वाले मास्क पहनकर यहां जंतर-मंतर पर ‘रोअर4राइट्स’ के बैनर तले एकत्र हुए। आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े निर्देशों में सार्वजनिक जगहों से कुत्तों को हटाने और रेबीज से पीड़ित या आक्रामक कुत्तों को ‘मानवीय तरीके से मृत्यु देने’ (यूथेनेशिया) के प्रावधान शामिल हैं। प्रदर्शन का एक मुख्य आकर्षण प्रतीकात्मक ‘‘कुत्ता-मुक्त पंचायत, पुलिस थाना’’ था, जहां कार्यकर्ताओं ने एक नुक्कड़ नाटक पेश किया। इसके जरिये उन्होंने पशुओं के खिलाफ अपराधों को लेकर समाज की कथित उदासीनता को रेखांकित किया।

नाटक में एक महिला कुत्ते के साथ कथित यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने जाती है, लेकिन पुलिस अधिकारी पशु को पीड़ित मानने से इनकार करते हुए उसे लौटा देता है। प्रदर्शनकारियों ने चार प्रमुख मांगें उठाईं-पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) ऑपरेशन से पहले रक्त जांच अनिवार्य की जाए, आवारा कुत्तों को अवैध रूप से हटाना बंद किया जाए, पशु क्रूरता संबंधी शिकायतों को पुलिस अनिवार्य रूप से दर्ज करे और उनकी जांच करे तथा पशु संरक्षण कानूनों को मजबूत कर दोषियों के लिए कठोर सजा का प्रावधान किया जाए।

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प्रदर्शन के आयोजकों में शामिल प्रीति ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य पशु कल्याण कानूनों के क्रियान्वयन में कमियों की ओर ध्यान आकर्षित करना और यह सुनिश्चित करना है कि अधिकारी पशुओं के खिलाफ क्रूरता को गंभीरता से लें। प्रीति ने कहा, ‘‘हम यहां केवल कुत्तों के लिए नहीं आए हैं, बल्कि हर उस बेजुबान पशु के लिए आए हैं जो इसलिए पीड़ा सहता है क्योंकि या तो कानून कमजोर हैं या उन्हें ठीक से लागू नहीं किया जाता।’’ प्रदर्शन स्थल पर विरोध का अलग ही रंग दिखा। कुत्तों, बिल्लियों और अन्य पशुओं के चित्र वाले मुखौटे पहने प्रदर्शनकारी उन स्वयंसेवकों के साथ नजर आए जिनके हाथों में पशुओं के प्रति करुणा की मांग करने वाले पोस्टर और बैनर थे। प्रदर्शनस्थल पर एक बड़े मंच की पृष्ठभूमि में कुत्तों, मवेशियों, हाथियों, भैंसों एवं अन्य पशुओं की तस्वीरें लगी थीं और इसके साथ नारा लिखा था—‘‘बेजुबानों के लिए जन आंदोलन।’’

पशु चिकित्सक और पशु अधिकार कार्यकर्ता संजय महापात्रा ने कहा कि प्रदर्शनस्थल पर हुए नुक्कड़ नाटक का उद्देश्य यह दिखाना था कि उत्पीड़न और क्रूरता के मामलों की शिकायत दर्ज कराने की कोशिश के दौरान पशु कल्याण स्वयंसेवकों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सभा में वक्ताओं ने कहा कि आवारा कुत्ते शहरी मोहल्लों का अभिन्न हिस्सा हैं और सार्वजनिक स्थानों से पशुओं को बड़े पैमाने पर हटाने से न तो मनुष्य-पशु टकराव समाप्त होगा और न ही जनस्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का समाधान निकलेगा। उच्चतम न्यायालय ने मई में कहा था कि अधिकारियों को रेबीज से पीड़ित, असाध्य रूप से बीमार या मानव जीवन के लिए स्पष्ट रूप से खतरनाक आवारा कुत्तों को मानवीय तरीके से मृत्यु देने (यूथेनेशिया) की अनुमति है।

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