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चंडीगढ़ में 83 शराब के ठेकों की नीलामी से 496.81 करोड़ का राजस्व एकत्र, पलसौरा का ठेका 16.71 करोड़ रुपये में बिका

VVinita Kohli
चंडीगढ़ में 83 शराब के ठेकों की नीलामी से 496.81 करोड़ का राजस्व एकत्र, पलसौरा का ठेका 16.71 करोड़ रुपये में बिका
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चंडीगढ़: यूटी प्रशासन के एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग वीरवार को 97 में से 83 शराब के ठेकों को ही नीलाम करने में कामयाब हुआ। अभी जो ठेके नहीं बिक सके हैं उनके लिए दोबारा ऑक्शन होगी। वीरवार को शहर के इन 83 शराब ठेकों की हुई नीलामी में पलसौरा का ठेका सबसे महंगा 16 करोड़ 71 लाख रुपये में बिका। इसका रिजर्व प्राइस 11 करोड़ 41 लाख रुपये था। पिछले साल यह ठेका 14 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ था जबकि इसका रिजर्व प्राइस 10.22 करोड़ रुपए तय किया गया था। इस साल दूसरा सबसे महंगा ठेका धनास का 12.27 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ। इसका रिजवर्व प्राइस 9.62 करोड़ रुपये था। 

पिछले कुछ वर्षों में चंडीगढ़ का सबसे महंगा ठेका धनास का होता था। पिछले साल यह ठेका साल 11.27 करोड़ में नीलाम हुआ था। जबकि इसका रिजर्व प्राइस 8.71 करोड़ रुपए था। वहीं, 2024 में हुई नीलामी में धनास का ठेका सबसे महंगा 9.17 करोड़ में बिका था। तीसरा सबसे महंगा ठेका  सेक्टर-61 मार्केट में नीलाम हुआ। यह 11.52 करोड़ में बिका जबकि इसकी रिजर्व प्राइस 8.21 करोड़ रुपये था। पिछले साल यह ठेका 12.25 करोड़ में बिका था जबकि इसकी रिजर्व प्राइस 7.39 करोड़ था। एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग ने लाइसेंस फीस के रूप में कुल 496.81 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया, जो रिजर्व प्राइस से लगभग 29% अधिक है। साथ ही भागीदारी शुल्क के रूप में 3.90 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। 

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कुल 97 ठेकों में से 84 ठेकों के विरुद्ध इलेक्ट्रॉनिक रूप से कुल 195 बोलियां प्राप्त हुईं थीं जिनका रिजर्व प्राइस 385.24 करोड़ रुपये था। हालांकि एलयू-77 के लिए एकमात्र बोलीदाता तकनीकी रूप से अयोग्य पाया गया। अगर कोई शराब कारोबारी किसी भी ठेके के पैसे देने में असफल होता है तो उसके बाकी ठेके भी सील होंगे। शेष 14 लाइसेंसिंग यूनिट्स के लिए टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। बोलीदाताओं से मिले उत्साहजनक रिस्पांस के मद्देनजर विभाग को विश्वास है कि बचे हुए ठेकों का आवंटन सफलतापूर्वक पूर्ण किया जाएगा तथा निर्धारित आरक्षित मूल्य से अधिक राजस्व प्राप्त होने की संभावना है, जिससे राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

वीरवार को सेक्टर-10 स्थित होटल माउंटव्यू में सभी बोलीदाताओं द्वारा जमा की गई फाइनेंशियल बिड खोली गई। इस मौके पर एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर निशांत कुमार यादव, एसडीएम सेंट्रल नवीन, कलेक्टर (एक्साइज) प्रद्युमन सिंह, एईटीसी प्रदीप रावल मौजूद थे। पीसीएस अधिकारी पवितर सिंह को चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। बुधवार को इनकी टेक्निकल बिड खोली गई थी। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि नई एक्साइज पॉलिसी का उद्देश्य पारदर्शिता लाना तथा प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से राजस्व में वृद्धि करना है। इस दिशा में ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई गई तथा सभी हितधारकों को डिजिटल सिग्नेचर और एनआईसी द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के उपयोग के लिए व्यापक प्रशिक्षण दिया गया था।

चंडीगढ़ वाइन कॉन्ट्रैक्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट दर्शन सिंह कलेर के अनुसार उन्होंने इस बार 10 शराब के ठेके लिए हैं और ऑक्शन प्रक्रिया से बहुत खुश हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि एक चीज से मायूसी है क्योंकि प्रशासन ने ऑक्शन में भाग लेने वाले शराब कारोबारियों को अपने परिवार की डिटेल देने के लिये कहा था मगर ऑक्शन के समय किसी ने भी अपने परिवार की डिटेल नहीं दी।  गौरतलब है कि बुधवार को टेक्निकल बिड प्रक्रिया के दौरान देर रात एक्साइज एंड टैक्सेशन कार्यालय के बाहर हंगामा भी हुआ। आरोप है कि कई ठेकेदारों ने बिड भरते समय अपने पारिवारिक सदस्यों की पूरी जानकारी साझा नहीं की थी। विभाग की ओर से ऐसे मामलों में बिड रद्द करने की बात सामने आने पर ठेकेदारों ने विरोध शुरू कर दिया था। इस बार एक्साइज पॉलिसी में साफ नियम है कि कोई भी व्यक्ति या उसका परिवार 10 से अधिक ठेके नहीं ले सकता। इसके लिए टेक्निकल बिड में पारिवारिक जानकारी देना अनिवार्य किया गया था।

डिपार्टमेंटल स्टोर्स में फिर मिलेगी शराब, जीपीएस से होगी निगरानी

इस एक्साइज पॉलिसी की प्रमुख विशेषताओं में डिपार्टमेंटल स्टोर्स में शराब लाइसेंस की पुनः शुरुआत, बार लाइसेंसधारियों द्वारा निकटवर्ती दो दुकानों से शराब की खरीद, रिटेल वेंड्स के लिए सुरक्षा राशि में वृद्धि तथा शराब के परिवहन के लिए जीपीएस प्रणाली को अनिवार्य करना शामिल है। नई पॉलिसी के अनुसार होटल और रेस्टोरेंट संचालक एल-3, एल-4, एल-5, एल-3ए, एल-4ए, एल-10ए और एल-10एए श्रेणी में बार लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे। हालांकि लाइसेंस तभी जारी किया जाएगा, जब संबंधित प्रतिष्ठान का संचालन शुरू हो जाएगा।

एल-3, एल-4 और एल-5 लाइसेंसधारक बार लाइसेंस मिलने के 15 दिन बाद माइक्रो-ब्रुअरी लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे। नई पॉलिसी के तहत होटल, बार, रेस्टोरेंट और पब में शराब परोसने वाले लाइसेंसधारकों के लिए अल्कोमीटर की सुविधा अनिवार्य की गई है।

अब हर बिक्री पर बिल जरूरी, नियम तोड़े तो लगेगा जुर्माना

नई एक्साइज पॉलिसी के तहत यदि कोई लाइसेंसधारी समय पर लाइसेंस फीस जमा नहीं करता है तो आबकारी विभाग उसका ठेका सील कर सकता है। इसके अलावा उसके अन्य ठेके भी रद्द किए जा सकते हैं। देरी से भुगतान करने पर 1.5 प्रतिशत मासिक ब्याज भी देना होगा। पॉलिसी में स्पष्ट है कि होटल, बार, रेस्टोरेंट और पब में शराब परोसने वाले सभी लाइसेंसधारकों के लिए एल्कोमीटर की सुविधा अनिवार्य कर दी गई है, ताकि शराब पीकर वाहन चलाने की घटनाओं को रोका जा सके।

इसके अलावा शराब तस्करी रोकने के लिए सीसीटीवी सर्विलेंस बढ़ाने को कहा गया है। सभी शराब विक्रेताओं के लिए हर बिक्री पर बिल जारी करना अनिवार्य होगा और पीओएस मशीन के माध्यम से डिजिटल भुगतान की सुविधा भी देनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर प्रति घटना 5000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। लाइसेंस फीस समय पर जमा न करने पर विभाग ठेका सील कर सकता है और अन्य ठेके भी रद्द किए जा सकते हैं। देरी से भुगतान पर 1.5 प्रतिशत मासिक ब्याज भी वसूला जाएगा।

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