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Child Trafficking Bahadurgarh: कोख का काला धंधा: बहादुरगढ़ में बच्चा तस्कर गिरोह का पर्दाफाश, 40 शिशुओं को बेचने की बात आई सामने

AAmandeep Singh
कोख का काला धंधा: बहादुरगढ़ में बच्चा तस्कर गिरोह का पर्दाफाश, 40 शिशुओं को बेचने की बात आई सामने
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बहादुरगढ़। हड्डियों को कंपा देने वाली एक ऐसी सच्चाई सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। बहादुरगढ़ पुलिस की गिरफ्त में आए बच्चा तस्कर गिरोह ने पूछताछ में जो राज उगले हैं, वे किसी डरावनी फिल्म की पटकथा से कम नहीं हैं। पुलिस जांच में यह साफ हो गया है कि यह गिरोह महज कुछ बच्चों तक सीमित नहीं था, बल्कि पिछले साढ़े तीन साल से मासूमों की खरीद-फरोख्त का एक संगठित काला साम्राज्य चला रहा था। अब तक की तफ्तीश में 40 से ज्यादा ऐसे मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें नवजातों को चंद रुपयों के लिए ‘सामान’ की तरह बेचा गया।

2 लाख की ‘खरीद’ और 9 लाख की ‘बिक्री’: ऐसे चलता था मुनाफाखोरी का खेल

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इस गिरोह का काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद पेशेवर और क्रूर था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये लोग आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता या अनचाहे गर्भ वाले मामलों को निशाना बनाते थे। उनसे महज 2 से 3 लाख रुपये में नवजात को खरीद लिया जाता था। इसके बाद शुरू होता था असली मुनाफाखोरी का खेल। जरूरतमंद और निसंतान दंपतियों को ये तस्कर 8 से 9 लाख रुपये की मोटी रकम वसूलकर बच्चा थमा देते थे। इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी कागजात और जाली पहचान का भी सहारा लिया जाता था ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके।

पंजाब और यूपी से जुड़े हैं तार, अब तक 9 गिरफ्तार

पुलिस ने इस रैकेट की गुत्थी सुलझाते हुए अब तक कुल नौ आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। गिरोह की मुख्य कड़ी के रूप में पंजाब के मुक्तसर की रहने वाली बेअंत कौर का नाम सामने आया है। वहीं, गाजियाबाद के रहने वाले दो अन्य सदस्य सलीम अहमद और आकिल मलिक भी पुलिस की गिरफ्त में हैं। ये तीनों इस नेटवर्क के महत्वपूर्ण स्तंभ थे, जो डिमांड और सप्लाई के बीच पुल का काम करते थे। शुरुआती तौर पर तीन गिरफ्तारियां हुई थीं, लेकिन कड़ियां जुड़ते-जुड़ते यह आंकड़ा नौ तक पहुंच गया है।

देशव्यापी नेटवर्क की आशंका, बढ़ सकती है संख्या

बहादुरगढ़ पुलिस की टीमें अब उन सभी 40 मामलों की बारीकी से जांच कर रही हैं, जिनका जिक्र आरोपियों ने पूछताछ में किया है। आशंका जताई जा रही है कि शिशुओं की तस्करी का यह नेटवर्क केवल हरियाणा या दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश के दूर-दराज इलाकों तक फैले हुए हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पीड़ित बच्चों और संलिप्त आरोपियों की संख्या और बढ़ना तय है। पुलिस अब उन परिवारों तक भी पहुंचने की कोशिश कर रही है जिन्होंने इन तस्करों से बच्चे खरीदे हैं।

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