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Bahadurgarh News: बहादुरगढ़ गबन केस: ट्रांसपोर्ट इंचार्ज ने कंपनी को लगाया 9.57 करोड़ का चूना, ऐसे खुला राज

AAmandeep Singh
बहादुरगढ़ गबन केस: ट्रांसपोर्ट इंचार्ज ने कंपनी को लगाया 9.57 करोड़ का चूना, ऐसे खुला राज
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बहादुरगढ़। हरियाणा के बहादुरगढ़ में औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा और इंटरनल ऑडिट पर अब सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। दहकोरा गांव की एक नामचीन स्टैपिंग कंपनी में पिछले तीन सालों से चल रहा गबन का खेल अब पुलिस की फाइलों तक पहुंच गया है। कंपनी के निदेशक अनुराग चौधरी ने जब अपने खातों का मिलान करवाया, तो आंकड़े देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस कर्मचारी को गाड़ियों और लेन-देन का जिम्मा सौंपा गया था, उसी ने पूरे सिस्टम को हैक कर लिया था।

साल दर साल बढ़ता गया लालच

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शिकायत के मुताबिक, हिमांशु वधवा को साल 2018 में ट्रांसपोर्ट इंचार्ज की जिम्मेदारी दी गई थी। शुरुआती साल ठीक रहे, लेकिन 2023 के बाद गबन की रफ्तार पकड़ ली गई। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि साल 2023-24 में 1.75 करोड़, 2024-25 में 3.96 करोड़ और मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 3.85 करोड़ रुपये का गबन किया जा चुका है। महज तीन वर्षों में यह आंकड़ा करीब साढ़े नौ करोड़ के पार पहुंच गया।

वाउचर में हेराफेरी का नायाब तरीका

धोखाधड़ी का तरीका इतना शातिराना था कि पहली नजर में पकड़ना नामुमकिन था। 3 अप्रैल 2023 की एक एंट्री का हवाला देते हुए निदेशक ने बताया कि सिर्फ 1700 रुपये के एक साधारण पास वाउचर को रिकॉर्ड रजिस्टर में चालाकी से 1.70 लाख रुपये दर्शाया गया। इस छोटी सी हेराफेरी से जो अतिरिक्त राशि बची, उसे आरोपियों ने अपनी जेब में डाल लिया। इसी तरह हजारों प्रविष्टियों (entries) में बदलाव कर कंपनी के खजाने को खाली किया गया।

गबन के पैसे से खड़ी की जागीर

आरोप है कि हिमांशु ने अकेले इस काम को अंजाम नहीं दिया, बल्कि उसके साथ कुछ और लोग भी शामिल थे। गबन की गई इस भारी-भरकम राशि से आरोपियों ने बेनामी संपत्तियां खरीदीं और मोटी रकम अपने करीबियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। जब कंपनी प्रबंधन को शक हुआ और उन्होंने हिमांशु से पूछताछ की, तो उसने कथित तौर पर निदेशक को जान से मारने की धमकी तक दे डाली।

पुलिस की जांच और आगामी कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए बहादुरगढ़ पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी ओम सिंह ने पुष्टि की है कि कंपनी के दस्तावेजों को कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच की तैयारी की जा रही है। पुलिस अब उन बैंक खातों को खंगाल रही है जिनमें पैसा भेजा गया था। जल्द ही इस मामले में बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि इतने बड़े स्तर पर गबन बिना किसी उच्च प्रबंधन की मिलीभगत या लापरवाही के संभव नहीं था, जिसकी जांच अब पुलिस का मुख्य फोकस है।

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