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इस कदम का उद्देश्य कफ सिरप सहित सिरप आधारित दवाओं को कड़े नियामक दायरे में लाना है

AAlok Verma
अब डॉक्टर की पर्ची के बगैर कप सिरप बेचने पर बैन
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नयी दिल्ली। दवा की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं
के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नियमों में संशोधन किया है
, जिसके तहत अब कफ सिरप सहित
सभी प्रकार के सिरप की डॉक्टर के पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के बिना बिक्री पर रोक
लगा दी गई है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य कफ सिरप सहित सिरप
आधारित दवाओं को कड़े नियामक दायरे में लाना है।
इस
संबंध में आधिकारिक राजपत्र में
‘औषधि (पांचवां संशोधन) नियम, 2026’ के माध्यम से अधिसूचना जारी
की गई है। यह संशोधन अपने प्रकाशन की तिथि से ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के
अनुसार
, औषधि
नियम
1945 की अनुसूची ‘के’ (शेड्यूल के) के ‘दवाओं की श्रेणी’ वाले कॉलम की मद संख्या 7 से ‘सिरप’ शब्द को हटा दिया गया है।

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मालूम हो कि अनुसूची ‘के’ दवाओं की उन श्रेणियों को
निर्दिष्ट करती है
, जिन्हें
निर्धारित शर्तों के अधीन औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम एवं नियमों के तहत
निर्माण
, बिक्री
और वितरण से जुड़े कुछ प्रावधानों से छूट प्राप्त होती है।

सरकार द्वारा यह कदम पिछले साल दिसंबर में जारी एक मसौदा अधिसूचना के
बाद उठाया गया है
, जिसके
जरिए हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे।

मंत्रालय ने कहा कि दवाओं से जुड़े तकनीकी मामलों पर देश की सर्वोच्च
वैधानिक संस्था
‘ड्रग
टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड
‘ (डीटीएबी)
के साथ परामर्श और जनता से प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद ही इस संशोधन को
अंतिम रूप दिया गया है।

यह निर्णय हाल के वर्षों में कई देशों में कफ सिरप में मिलावट के
कारण बच्चों की मौत की खबरों के बाद
, ‘लिक्विड ओरल फॉर्मूलेशन’ पर बढ़ी नियामक निगरानी की
पृष्ठभूमि में आया है।

सूत्रों के अनुसार, इस नवीनतम संशोधन से सिरप आधारित दवाओं की निगरानी और उनके
स्रोत का पता लगाने की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। इससे यह सुनिश्चित किया
जा सकेगा कि निर्माता और विक्रेता दोनों ही लाइसेंसिंग और गुणवत्ता नियंत्रण की
सख्त शर्तों का पालन करें।

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