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नगर निगम चुनाव: भाजपा की रजनी रानी को हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत, नामांकन रद्द होने का फैसला बरकरार

VVinita Kohli
नगर निगम चुनाव: भाजपा की रजनी रानी को हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत, नामांकन रद्द होने का फैसला बरकरार
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बरनाला: नगर निगम चुनाव के अखाड़े से इस समय की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। नगर निगम बरनाला के सबसे बहुचर्चित और हॉट सीट माने जाने वाले वार्ड नंबर 31 में भारतीय जनता पार्टी को उस समय बहुत बड़ा झटका लगा, जब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की बेंच ने भाजपा उम्मीदवार रजनी रानी की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले ने भाजपा खेमे में हलचल मचा दी है और उम्मीदवार की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है। 

अदालत से न्याय की आस लगाए बैठी रजनी रानी को बड़ा झटका लगा है, जबकि दूसरी ओर सत्ताधारी दल ने फिलहाल राहत की सांस ली है। दरअसल, इस पूरे मामले पर चल रही गर्मा-गरम चर्चाओं पर रिटर्निंग ऑफिसर-कम-अतिरिक्त उपायुक्त जनरल ने अपने आधिकारिक आदेश संख्या 18 (18 मई 2026) के तहत स्पीकिंग ऑर्डर (स्पष्ट आदेश) जारी कर पूरी स्थिति साफ कर दी है। भाजपा उम्मीदवार रजनी रानी पत्नी जोगिंदर पाल टिंकू ने आरोप लगाया था कि सत्ताधारी दल के कथित दबाव में आकर रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके नामांकन पत्र रद्द किए हैं। लेकिन प्रशासन के लिखित आदेशों ने कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट ला दिया है।

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एक शिकायत, यू-टर्न और सरकारी रिपोर्ट का शिकंजा!

जानकारी के अनुसार, जब रजनी रानी ने नामांकन पत्र भरे तो मीनाक्षी पत्नी विनय गर्ग नामक महिला ने लिखित आपत्ति दर्ज कराई कि रजनी रानी ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ है। हालांकि, बाद में शिकायतकर्ता मीनाक्षी ने एक अनोखा ‘यू-टर्न’ लेते हुए अपनी आपत्तियां वापस ले ली! लेकिन तब तक कमान से तीर निकल चुका था। सहायक कमिश्नर नगर निगम बरनाला ने जब इसकी जांच की, तो सरकारी रिपोर्ट में साफ हो गया कि रजनी रानी ने अपने आवासीय मकान का रैंप गली में बनाकर अवैध रूप से सरकारी जगह पर कब्जा किया हुआ है।

रिटर्निंग ऑफिसर की आधिकारिक रिपोर्ट ने किया स्पष्ट

रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्ट कर दिया कि भले ही शिकायतकर्ता ने अपनी आपत्तियां वापस ले ली हो, लेकिन सरकारी अधिकारी सहायक कमिश्नर की आधिकारिक रिपोर्ट—जिसमें अवैध कब्जा स्पष्ट रूप से साबित हुआ है—को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस सरकारी रैंप और कब्जे की रिपोर्ट ने भाजपा उम्मीदवार को चुनावी मैदान से बाहर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि हाईकोर्ट से झटका खाने के बाद क्या भाजपा उम्मीदवार ट्रिब्यूनल में जाकर कोई राहत पा सकती हैं या वार्ड नंबर 31 की यह जंग अब एक नया मोड़ लेगी।

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