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Barnala News: शहणा में गैस सिलेंडर के लिए कतार में खड़े बुजुर्ग की मौत: एजेंसी की कुप्रबंधन और किल्लत ने ली जान

VVinita Kohli
Barnala News: शहणा में गैस सिलेंडर के लिए कतार में खड़े बुजुर्ग की मौत: एजेंसी की कुप्रबंधन और किल्लत ने ली जान
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शहणा/बरनाला: पंजाब के बरनाला जिले के गांव शहणा में शुक्रवार को एक अत्यंत दुखद और प्रशासनिक विफलता को उजागर करने वाली घटना सामने आई है। गैस सिलेंडर लेने के लिए सुबह पांच बजे से कतार में खड़े 66 वर्षीय बुजुर्ग भूषण कुमार मित्तल की दिल का दौरा पड़ने से मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने जहां पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है, वहीं गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संबंध में जब ‘जग मार्ग’ के जिला प्रभारी सुरेंद्र गोयल ने घटनास्थल पर पहुंचकर गैस लेने के लिए कतार में खड़े लोगों से बातचीत की, तो उनका कहना था कि भूषण कुमार अपने बेटे के साथ तड़के 5 बजे ही स्थानीय गैस एजेंसी के बाहर पहुँच गए थे। 

कतार में उनका 25वां नंबर था। काफी देर तक अपनी बारी का इंतजार करते समय अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे जमीन पर गिर पड़े। आसपास खड़े लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन दिल के दौरे ने उन्हें ऐसा अपनी चपेट में लिया कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस मामले के संबंध में जब इंडेन कॉर्पोरेशन बठिंडा के सेल्स मैनेजर संचित शर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि गैस की कोई किल्लत नहीं है और बुकिंग के अगले दिन ही सिलेंडर दिया जा रहा है। उन्होंने बुजुर्ग की मौत की घटना पर कहा कि वे एजेंसी मालिक से बात करेंगे और इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए जांच कराई जाएगी। 

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हालांकि, जमीनी हकीकत अधिकारियों के इन दावों के बिल्कुल उलट नजर आ रही है। गुस्साए उपभोक्ताओं सुखदेव सिंह, जसवीर सिंह, बलवीर सिंह, बिट्टू सिंह और राज सिंह ने आरोप लगाया कि एजेंसी मालिक का व्यवहार बेहद अड़ियल है। वह न तो किसी का फोन उठाता है और अक्सर अपनी ऊंची पहुंच होने का जिक्र करता रहता है। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी भी अपने दफ्तरों में बैठकर बयान जारी करके सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं, जबकि आम जनता की बांह पकड़ने वाला कोई नहीं है।

नियमों में अचानक बदलाव: 25 से किए 45 दिन

उपभोक्ताओं ने खुलासा किया कि पहले एजेंसी के बाहर लिखा हुआ था कि 25 दिनों के बाद सिलेंडर मिलेगा, जिसके कारण लोग पूरे 25 दिन बाद सुबह 4 बजे ही लाइनों में लग गए थे। लेकिन आज सुबह 9 बजे कर्मचारियों ने चालाकी से उस समय को बदलकर 45 दिन कर दिया। इस कारण सैकड़ों लोग, जो कई घंटों से इंतजार कर रहे थे, उन्हें दूसरे दिन भी खाली हाथ लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

रसोई का बजट और जरूरत प्रभावित

लोगों ने बताया कि आज के समय में हर घर की रसोई पूरी तरह से गैस सिलेंडर पर निर्भर है। किसी घर में सिलेंडर 20 दिन चलता है और अधिक से अधिक 30 दिन। ऐसे में 45 दिनों के बाद सिलेंडर देने का फैसला लोगों के चूल्हे ठंडे करने वाला है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस दुखद मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और गैस वितरण प्रणाली को तुरंत सुधारा जाए।

प्रशासनिक लापरवाही और खानापूर्ति के आरोप

इस घटना ने प्रशासन के उन दावों की हवा निकाल दी है जिनमें गैस की सप्लाई को सुचारू बताया जा रहा था। उपभोक्ताओं का कहना है कि अधिकारी अपने एसी दफ्तरों में बैठकर सिर्फ बयानबाजी करते हैं, जबकि हकीकत में आम लोगों को एक सिलेंडर के लिए कई-कई दिन धक्के खाने पड़ रहे हैं। प्रशासन द्वारा की जा रही इस ‘खानापूर्ति’ का नतीजा आज एक बेगुनाह बुजुर्ग की मौत के रूप में निकला है, जिसके कारण पूरे गांव में भारी रोष पाया जा रहा है।

गैस एजेंसियों की मनमानी और ‘सेटिंग’ की आशंका

ग्रामीणों रोशन लाल, सुनील कुमार, गुरदेव सिंह और मलकीत सिंह ने आरोप लगाया कि एजेंसी मालिकों द्वारा जानबूझकर किल्लत पैदा की जा रही है। पहले एजेंसी के बाहर 25 दिनों के बाद सिलेंडर मिलने का नोटिस लगाया गया था, लेकिन जब लोग सुबह 4 बजे से लाइनों में लग गए तो कर्मचारियों ने 9 बजे के करीब इस समय को बदलकर 45 दिन कर दिया। लोगों का सवाल है कि यदि गैस की कमी नहीं है, तो नियमों में यह अचानक बदलाव क्यों किया गया? उपभोक्ताओं ने शक जताया है कि आम लोगों का हक मारकर सिलेंडरों की कालाबाजारी की जा रही है।

रसोइयों के चूल्हे हुए ठंडे, लोगों में हाहाकार

ग्रामीणों के अनुसार एक सिलेंडर आमतौर पर 20 से 30 दिन ही चलता है, लेकिन एजेंसी द्वारा 45 दिनों की शर्त रखने के कारण कई घरों में चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि गैस वितरण प्रणाली में तुरंत सुधार नहीं किया गया और एजेंसी मालिक की मनमानी नहीं रोकी गई, तो वे आने वाले दिनों में तीखा संघर्ष करने के लिए मजबूर होंगे।

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