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Beaver Facts: प्रकृती का अद्भुत इंजीनियर: यह छोटा सा जानवर बनाता है ऐसे बांध, जो अंतरिक्ष से भी आते हैं नजर

AAmandeep Singh
Beaver Facts: प्रकृती का अद्भुत इंजीनियर: यह छोटा सा जानवर बनाता है ऐसे बांध, जो अंतरिक्ष से भी आते हैं नजर
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अक्सर माना जाता है कि पृथ्वी पर भूगोल बदलने या बड़े निर्माण करने की कला सिर्फ इंसानों के पास है, लेकिन वन्यजीव जगत में एक ऐसा भी फनकार है जो इस धारणा को गलत साबित करता है। हम बात कर रहे हैं बीवर की, जिसे दुनिया का सबसे छोटा और कुशल प्राकृतिक इंजीनियर कहा जाता है। दिखने में चूहे या नेवले जैसा यह जीव जब अपनी मेहनत पर उतरता है, तो नदियों की जलधारा का रुख तक मोड़ देता है। अपनी इसी अनोखी क्षमता के कारण यह जीव दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए हमेशा से कौतूहल का विषय रहा है।

लोहे जैसे मजबूत दांत और तैरने में मददगार शरीर की बनावट

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बीवर के पास सबसे अचूक हथियार उसके आगे के दो दांत होते हैं। प्रकृति ने इन्हें ऐसा बनाया है कि ये लगातार बढ़ते रहते हैं और कभी घिसते नहीं। इन दांतों की बदौलत बीवर कुछ ही समय में मोटे से मोटे पेड़ के तने को कुतर कर धराशायी कर देता है। पेड़ गिरने के बाद इसके मजबूत पिछले पैर और पूंछ काम आती है, जिसकी मदद से यह भारी-भरकम लकड़ियों और टहनियों को खींचकर पानी के भीतर ले जाता है। इसका पूरा शरीर ही एक कंक्रीट मिक्सर और क्रेन की तरह काम करने के लिए ढला हुआ है।

ऐसे वजूद में आता है बीवर का अभेद्य किला

लकड़ियां, घास और पत्थर इकट्ठा करने के बाद बीवर नदी या जलधारा के बीचों-बीच एक मजबूत दीवार यानी बांध (Dam) बनाना शुरू करता है। वह लकड़ियों को इस तरकीब से फंसाता है कि पानी का तेज बहाव धीरे-धीरे थम जाता है। इस ढांचे को वाटरप्रूफ बनाने के लिए वह नदी की तली से निकाली गई गीली मिट्टी और पत्तों का गारा लगाता है। नतीजा यह होता है कि नदी के पीछे एक बड़ा जलाशय या तालाब बन जाता है। इसी ठहरे हुए पानी के बीच वह अपना मुख्य घर बनाता है, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘लॉज’ कहा जाता है। इस घर की खासियत यह है कि इसमें घुसने का रास्ता पानी के भीतर से होता है, ताकि कोई भी शिकारी (जैसे भेड़िए या भालू) इन तक न पहुंच सकें।

अनजाने में रच देता है नया संसार, जैव विविधता को मिलता है सहारा

बीवर का यह निर्माण कार्य सिर्फ उसके अपने कुनबे को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है। उसके बनाए इन तालाबों के कारण जंगलों में एक नया इकोसिस्टम जन्म लेता है। शांत पानी मिलते ही वहां मछलियां, मेंढक, बत्तखें और कई तरह के जलीय पक्षी अपना डेरा जमा लेते हैं। सूखे के दिनों में जब बाकी नदियां सूख जाती हैं, तब बीवर के बनाए ये जलाशय पूरे जंगल के जानवरों की प्यास बुझाते हैं। इसके अलावा, ये बांध पहाड़ों से बहकर आने वाली मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और पानी को प्राकृतिक रूप से फिल्टर करने का काम भी करते हैं।

अंतरिक्ष से भी दिखती है इस नन्हे जीव की कारीगरी

बीवर की इंजीनियरिंग का लोहा खुद दुनिया भर के वैज्ञानिक भी मानते हैं। ‘arctic.noaa.gov’ (नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीवर के बनाए कुछ बांध इतने विशाल और फैले हुए होते हैं कि उन्हें पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहे सैटेलाइट्स और अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा भी साफ देखा जा सकता है। एक छोटे से जानवर द्वारा बिना किसी मशीनरी के तैयार की गई इतनी विशालकाय संरचनाएं वाकई में प्रकृति के सबसे बड़े और जीवंत चमत्कारों में से एक हैं।

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