सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बेंगलुरु शहर में ट्रैफिक की समस्या नई नहीं है, लेकिन रविवार को ओल्ड एयरपोर्ट रोड पर जो कुछ हुआ, उसने वीआईपी सुरक्षा के नाम पर आम नागरिकों को दी जाने वाली प्रताड़ना पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। आमतौर पर देखा जाता है कि किसी बड़े राजनेता या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के मूवमेंट के दौरान एम्बुलेंस और आम गाड़ियों को रोक दिया जाता है। इस बार इस व्यवस्था का शिकार एक गर्भवती महिला और उसका पति बने। राज्यपाल के काफिले की सुरक्षा के नाम पर रास्ता रोके जाने से आक्रोशित पति ने बिना किसी डर के बीच सड़क पर ही मोर्चा खोल दिया।
निर्माण कार्य से पहले ही रेंग रही थी जिंदगी, काफिले के फरमान ने बढ़ाई आफत
ओल्ड एयरपोर्ट रोड पर इन दिनों वैसे ही अंडरपास निर्माण कार्य के चलते सड़क संकरी हो चुकी है, जिससे पीक आवर्स में निकलना किसी जंग जीतने जैसा होता है। रविवार दोपहर को हालात तब बदतर हो गए जब पुलिस को राज्यपाल के गुजरने का वायरलेस मैसेज मिला। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक यूजर द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो के अनुसार, दोपहर करीब सवा बारह बजे राज्यपाल के मूवमेंट के लिए इस मुख्य मार्ग को करीब 30 मिनट तक पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया।
“मेरी पत्नी गाड़ी में तड़प रही है और गवर्नर अभी एयरपोर्ट पर ही हैं!”
वायरल हो रहे वीडियो के दृश्य हैरान करने वाले हैं। एक शख्स इसरो जंक्शन के पास जेब्रा क्रॉसिंग पर बैठकर ऑन-ड्यूटी ट्रैफिक पुलिसकर्मियों पर चिल्लाता हुआ नजर आ रहा है। उसका आरोप था कि उसकी पत्नी गर्भवती है, उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना बेहद जरूरी है, लेकिन पुलिस ने अति-उत्साह में आकर तब से गाड़ियां रोक रखी हैं जब राज्यपाल का विमान एचएएल (HAL) एयरपोर्ट पर उतरा भी नहीं था। चूंकि वहां कोई वैकल्पिक रास्ता या डायवर्जन नहीं था, इसलिए वह शख्स बेबसी और गुस्से में आकर खुद सड़क पर बैठ गया। बाद में जब हालात हाथ से निकलने लगे, तो स्थानीय पुलिस की आपातकालीन विंग ‘होयसला’ की गाड़ियों को मौके पर बुलाया गया। अधिकारियों की समझाइश और मिन्नतों के बाद शख्स वहां से हटा और काफिले को रास्ता मिल सका।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा; पुलिस बोली— 30 मिनट रोकना मुमकिन नहीं, पर होगी जांच
इस पूरी घटना ने इंटरनेट पर वीआईपी संस्कृति के खिलाफ लोगों के गुस्से को भड़का दिया है। नेटिजन्स सवाल उठा रहे हैं कि क्या किसी वीआईपी की सुरक्षा किसी आम नागरिक या होने वाले बच्चे की जान से ज्यादा कीमती है?
इधर, विवाद बढ़ता देख बेंगलुरु पुलिस बैकफुट पर है, हालांकि वह दावों को पूरी तरह सच नहीं मान रही। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, “आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट में किसी भी वीआईपी मूवमेंट के लिए 30 मिनट तक ट्रैफिक रोकना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। फिर भी, जनता की शिकायतों को देखते हुए जीवन बीमा नगर ट्रैफिक पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में हुई इस घटना की जांच एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) को सौंप दी गई है।” पुलिस अब एचएएल एयरपोर्ट से लेकर घटना स्थल तक के सभी सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि सटीक समय का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी।

