Bihar boat accident: बिहार के वैशाली जिले में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत के बाद केंद्रीय मंत्री और हाजीपुर के सांसद चिराग पासवान बुधवार को पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद गांव का दौरा कर मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात की। चिराग ने परिवारों को भरोसा दिया कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। यह हादसा मंगलवार रात करीब साढ़े आठ बजे हुआ था। गांव के लोग गंगा नदी पार दूसरे गांव में एक भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान नाव पलट गई। हादसे में 15 साल से कम उम्र के 13 बच्चों की जान चली गई। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद चिराग पासवान ने नाव की स्थिति और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि हादसे के समय इस्तेमाल की गई नाव क्षतिग्रस्त थी। उनके मुताबिक, गांव के लोगों के अनुरोध के बावजूद प्रशासन की ओर से नई नाव उपलब्ध नहीं कराई गई।
चिराग बोले- क्षतिग्रस्त नाव से सफर कराना अस्वीकार्य
चिराग पासवान ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि यदि नाव क्षतिग्रस्त थी और ग्रामीणों ने नई नाव उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, तो इस पहलू की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सूर्यास्त के काफी देर बाद इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को नाव पर सवार होकर नदी पार करने की अनुमति कैसे दी गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस तरह की घटना में जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि त्रासदी के लिए जिम्मेदार और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उनके मुताबिक, मामले में सामने आई जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साझा की जाएगी। चिराग के बयान के बाद हादसे के दौरान नाव की स्थिति, यात्रियों की संख्या और प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं जैसे सवाल अहम हो गए हैं। हालांकि, नाव के क्षतिग्रस्त होने और प्रशासन की कथित लापरवाही से जुड़े आरोपों की आधिकारिक जांच के नतीजे सामने आना बाकी हैं।
थाना प्रभारी और अंचल अधिकारी की भूमिका की जांच की मांग
हाजीपुर के सांसद ने जिला प्रशासन से संबंधित थाना प्रभारी और अंचल अधिकारी (सीओ) की भूमिका की जांच करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हादसे में 13 बच्चों की मौत ने नदी पार करने के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों के लिए नदी पार करना रोजमर्रा की जरूरतों और सामाजिक आयोजनों से जुड़ा हो सकता है, लेकिन नाव की सुरक्षा और यात्रियों की संख्या पर नियंत्रण जैसे पहलुओं की अनदेखी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। फिलहाल चिराग पासवान ने पीड़ित परिवारों को जवाबदेही तय करने का भरोसा दिया है। हादसे की वास्तविक परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों के बारे में अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यह भी पढें: चिराग पासवान ने अपनी मां के राज्यसभा चुनाव लड़ने की अटकलों को किया खारिज

