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पीयू के कॉलेजों में नए सत्र से एआई, साइबर सिक्योरिटी और डेटा साइंस के बीएससी कोर्स होंगे शुरू

VVinita Kohli
पीयू के कॉलेजों में नए सत्र से एआई, साइबर सिक्योरिटी और डेटा साइंस के बीएससी कोर्स होंगे शुरू
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चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) बदलते तकनीकी दौर के साथ कदम मिलाते हुए नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से अपने एफिलिएटेड कॉलेजों में आधुनिक और रोजगार देने वाले बीएससी कोर्स शुरू करने जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सिक्योरिटी और डेटा साइंस जैसे हाई-डिमांड क्षेत्रों में शुरू होने वाले ये कोर्स छात्रों के लिए करियर के नए रास्ते खोलेंगे और उन्हें ग्लोबल स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेंगे। ध्यान रहे कि पीयू प्रशासन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत अपने कोर्सेज में बड़ा बदलाव करते हुए चार नए कोर्स शुरू करने का फैसला लिया है। इन कोर्सों में बीएससी इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बीएससी इन साइबर सिक्योरिटी, बीएससी इन डेटा साइंस और मशीन लर्निंग से जुड़े प्रोग्राम शामिल हैं। यह कोर्स यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड कॉलेजों में शुरू किए जाएंगे, जिससे अधिक से अधिक छात्रों को इनका लाभ मिल सके। 

इस संबंध में पीयू की वाइस चांसलर प्रो. रेनू विग का कहना है कि यूनिवर्सिटी का फोकस अकादमिक गुणवत्ता, इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप कोर्स और छात्रों के समग्र विकास पर है। उन्होंने कहा कि आज के समय में एआई, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी की मांग देश-विदेश में तेजी से बढ़ रही है, इसलिए इन क्षेत्रों में पढ़ाई छात्रों को बेहतर करियर अवसर प्रदान करेगी।

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कॉलेजों में लागू करने से पहले होगी इंफ्रास्ट्रक्चर जांच

पीयू प्रशासन के अनुसार, इन कोर्सों का सिलेबस पहले ही तैयार किया जा चुका है और इसे संबंधित बोर्ड ऑफ स्टडीज से मंजूरी भी मिल चुकी है। जल्द ही इसे कॉलेजों को भेजा जाएगा, जिसके बाद इच्छुक कॉलेज इन कोर्सों को शुरू करने के लिए आवेदन करेंगे। इसके लिए यूनिवर्सिटी की इंस्पेक्शन कमेटी कॉलेजों का दौरा करेगी और वहां उपलब्ध फैकल्टी, लैब और अन्य तकनीकी सुविधाओं की जांच करेगी। जिन कॉलेजों में आवश्यक संसाधन नहीं होंगे, उन्हें पहले अपनी कमियां दूर करनी होंगी। इसके बाद ही उन्हें कोर्स शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।

प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और इंडस्ट्री कनेक्ट पर जोर

इन नए कोर्सों की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि पढ़ाई केवल सैद्धांतिक नहीं होगी, बल्कि छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट वर्क और इंडस्ट्री से जुड़े अनुभव दिए जाएंगे। कोर्स में पायथन, जावा, आर, डेटा स्ट्रक्चर, स्टैटिस्टिक्स और न्यूरल नेटवर्क जैसे आधुनिक विषय शामिल होंगे। यूनिवर्सिटी का उद्देश्य छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाना है, ताकि वे पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे नौकरी या स्टार्टअप की दिशा में आगे बढ़ सकें।

शुरुआत में प्रत्येक कोर्स में लगभग 40 सीटें रखने की योजना है। अच्छे रिस्पॉन्स के बाद सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इन कोर्सों में प्रवेश के लिए 12वीं में साइंस स्ट्रीम और मैथ्स विषय अनिवार्य होगा। कुछ कोर्सों में एडमिशन पीयू-सीईटी के माध्यम से भी किया जा सकता है, जिसमें 12वीं के अंकों को भी वेटेज दिया जाएगा। पीयू ऑनर्स स्कूल सिस्टम के तहत दो नए चार वर्षीय कोर्स भी शुरू करने जा रही है। इनमें बीएससी फॉरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी और बीएससी इन रिन्यूएबल एनर्जी एंड स्मार्ट मटीरियल्स शामिल हैं। 

ये कोर्स फोर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के तहत संचालित होंगे, जिसमें मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की सुविधा होगी। फॉरेंसिक साइंस कोर्स के लिए अलग विभाग स्थापित किया गया है, जिसमें 30 सीटों से शुरुआत होगी। वहीं रिन्यूएबल एनर्जी कोर्स में 20 सीटें रखी गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में इन क्षेत्रों में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। पीयू प्रशासन ने इस वर्ष छात्रों की मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता देने की बात भी कही है। इसके लिए मेंटर-मेंटी प्रोग्राम शुरू किया गया है और एक ‘थॉट लैब’ स्थापित की जाएगी। इसके अलावा कैंपस में पेड पार्किंग, स्मार्ट कार्ड सिस्टम और नई हॉस्टल सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी।

रोजगार और सैलरी के मिलेंगे बेहतर अवसर

इन कोर्सों के माध्यम से छात्रों को आईटी, बैंकिंग, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स और रिसर्च सेक्टर में करियर बनाने का मौका मिलेगा। एआई/एमएल इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और साइबर सिक्योरिटी एनालिस्ट जैसे पदों पर शुरुआती सैलरी 6 से 12 लाख रुपये सालाना तक हो सकती है। पीयू की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब पारंपरिक साइंस स्ट्रीम में छात्रों का रुझान घट रहा है। ऐसे में ये नए कोर्स न केवल छात्रों को आकर्षित करेंगे, बल्कि उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार भी करेंगे। वीसी प्रो. रेनू विग ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी का उद्देश्य छात्रों को तकनीकी रूप से सक्षम, नवाचारी और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।

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