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Free Ration Scheme : राशनकार्ड धारकों की मौज: अप्रैल में ही मिल जाएगा जून तक का अनाज, सरकार का बड़ा फैसला

AAmandeep Singh
राशनकार्ड धारकों की मौज: अप्रैल में ही मिल जाएगा जून तक का अनाज, सरकार का बड़ा फैसला
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नई दिल्ली | सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े देश के करोड़ों परिवारों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 के कोटे के साथ ही आगामी मई और जून महीने का राशन भी एक साथ देने का ऐलान किया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि करते हुए लाभार्थियों को अपने नजदीकी डिपो से संपर्क करने को कहा है। हालांकि सरकार ने इस ‘एडवांस’ वितरण के पीछे कोई राजनैतिक कारण नहीं बताया है, लेकिन गलियारों में इसे अनाज भंडारण प्रबंधन (Grain Management) से जोड़कर देखा जा रहा है।

गोदामों में ‘ओवरफ्लो’ और नई फसल की चुनौती

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दरअसल, देशभर के सरकारी गोदाम इस समय अनाज से लबालब भरे हुए हैं। दूसरी ओर, रबी मार्केटिंग सीजन की शुरुआत हो चुकी है और मंडियों में गेहूं की भारी आवक होने वाली है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस नई फसल को सुरक्षित रखने की है। जानकारों का मानना है कि तीन महीने का राशन एक साथ बांटने से गोदामों में पर्याप्त जगह बन जाएगी, जिससे नई फसल की खरीद और भंडारण बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल सकेगा। यह कदम किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति पैदा करने वाला है।

फर्जी राशनकार्डों पर चला सरकारी ‘हंटर’

अनाज वितरण में होने वाली हेरा-फेरी और लीकेज को रोकने के लिए सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है। खाद्य राज्यमंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया के अनुसार, आधार सीडिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन के चलते अपात्र लोगों को सिस्टम से बाहर करना आसान हो गया है। आंकड़ों पर गौर करें तो हरियाणा इस मामले में देश में सबसे आगे रहा है, जहां अकेले 13.43 लाख फर्जी या अपात्र राशनकार्डों को निरस्त किया गया है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि तकनीक के जरिए अब केवल उन्हीं लोगों को अनाज मिल रहा है जो वास्तव में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।

लाभार्थियों के लिए जरूरी निर्देश

अप्रैल महीने में राशन लेने जाने वाले परिवारों को सलाह दी गई है कि वे अपने साथ थैले और परिवहन का उचित प्रबंध करके जाएं, क्योंकि 3 महीने का अनाज एक साथ मिलना वजन में काफी ज्यादा होगा। राशन डिपो संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे ई-पॉस (e-POS) मशीनों के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित करें और वितरण में किसी भी तरह की कोताही न बरतें।

यह योजना न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों को आर्थिक संबल भी प्रदान करती है। कोरोना काल में शुरू हुई यह मुफ्त राशन की मुहिम अब भारतीय कल्याणकारी राज्य का एक मजबूत आधार स्तंभ बन चुकी है।

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