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केंद्र ने डड्डूमाजरा में वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट को दी स्वीकृति, चंडीगढ़ में कचरा प्रबंधन में होगा सुधार

VVinita Kohli
केंद्र ने डड्डूमाजरा में वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट को दी स्वीकृति,  चंडीगढ़ में कचरा प्रबंधन में होगा सुधार
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चंडीगढ़: केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। यह जानकारी शहरी विकास एवं आवास राज्य मंत्री तोखन साहू ने लोकसभा में सांसद मनीष तिवारी द्वारा उठाए गए प्रश्न के जवाब में दी। मनीष तिवारी ने नियम 377 के तहत लोकसभा में चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा में कचरा डंप माउंड की समस्या और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाया था। मंत्री ने बताया कि केंद्र ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है, जिससे कचरे के प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन दोनों में सुधार होगा। 

हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि डड्डू माजरा डंपिंग साइट को पूरी तरह साफ करने और वहां जमा कचरे के निस्तारण की जिम्मेदारी चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ प्रशासन की है। इस संबंध में केंद्र ने स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही तय की। साहू ने लोकसभा में जानकारी दी कि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा डड्डूमाजरा डंपसाइट पर पहचाने गए 5.10 लाख मीट्रिक टन लेगेसी वेस्ट को पहले ही ठीक किया जा चुका है। साथ ही, इस स्थल पर लगभग 55,000 मीट्रिक टन अनप्रोसेस्ड कचरे पर वर्तमान में निपटान कार्य जारी है। 

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साहू ने यह भी बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि भविष्य में इस प्रकार के कचरे का संचय रोका जाए और इसके लिए पर्याप्त वेस्ट प्रोसेसिंग सुविधाओं की स्थापना की जाएगी। इससे शहर में कचरा प्रबंधन में सुधार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साहू ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन शहरी के तहत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नगर निगम ठोस अपशिष्ट के 100 प्रतिशत वैज्ञानिक निपटान को सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

इस सहायता के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की वेस्ट प्रोसेसिंग सुविधाओं की स्थापना शामिल है, जैसे कि वेस्ट-टू-कम्पोस्ट प्लांट, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी, कंस्ट्रक्शन एवं डिमोलिशन (सीएंडडी) वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट, बायो-मिथनेशन प्लांट और पुराने कचरे (लेगेसी वेस्ट) का निपटान शामिल है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन से चंडीगढ़ में कचरे का प्रभावी निपटान और ऊर्जा व पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं, मनीष तिवारी ने कहा कि डड्डू माजरा कचरा डंप को समाप्त करने और साइट की बायो-रिमेडिएशन के लिए संसद में उनके लगातार उठाए गए मुद्दों का असर अब दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस लंबे समय से लंबित मुद्दे को उन्होंने न केवल संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया, बल्कि संसद में भी बार-बार निर्णायक कार्रवाई की मांग की। मीडिया को जानकारी देते हुए, तिवारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने ‘वेस्ट-टू-एनर्जी’ प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दे दी है और प्रोजेक्ट में केंद्र के हिस्से की स्वीकृति भी जारी कर दी गई है।

तिवारी ने सख़्त लहजे में कहा कि जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बने इस मुद्दे पर उनके निरंतर प्रयासों का अंततः परिणाम सामने आया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डंप साइट की सफाई सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी अभी भी चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ प्रशासन की ही है। निगम और प्रशासन की लापरवाही स्पष्ट है, क्योंकि इन्होंने संसद, अदालतों और संसदीय स्थायी समितियों को अलग-अलग समय-सीमाएं दीं, लेकिन बाद में उन प्रतिबद्धताओं की अनदेखी की। तिवारी ने ज़ोर देते हुए, कहा कि चंडीगढ़ नगर निगम को अस्थायी उपायों से आगे बढ़कर डंप साइट की पूरी सफाई सुनिश्चित करनी चाहिए थी। 

उन्होंने डड्डू माजरा में बंद पड़े ठोस कचरा प्रोसेसिंग प्लांट को लेकर भी केंद्र से बार-बार सवाल उठाए, जो स्थिति आधिकारिक आंकड़ों से उलट है और अधिकारी सीधे जवाबों से बच रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने मज़दूरों के वेतन में देरी, कचरा प्रोसेसिंग के वैकल्पिक इंतज़ामों की कमी और साइट के प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार डिफॉल्टिंग कंसेशनरी के खिलाफ कमज़ोर कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा कि इस समस्या का वास्तविक और टिकाऊ समाधान चार शहरों चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और न्यू चंडीगढ़ के लिए एक मेगा इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र में निहित है, जिसमें इन चारों शहरों की भौगोलिक सीमाओं के भीतर आने वाले सभी नगर निकाय शामिल हों। यह परियोजना भारत सरकार द्वारा एक केंद्रीय परियोजना के रूप में शुरू की जानी चाहिए। 

तिवारी ने अफ़सोस जताते हुए, कहा कि केंद्र सरकार इन चारों शहरों को एकीकृत क्षेत्र के रूप में देखने की बजाय अलग-अलग साइलो में देखती है, फिर चाहे वह आर्थिक विकास हो, कनेक्टिविटी हो, रोज़गार सृजन हो या फिर कचरा प्रबंधन का दृष्टिकोण हो। इसी कारण ये चारों शहर अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर पा रहे हैं।

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