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Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा से मिलती है शांति और साहस, जानें सही विधि और नियम

VVinita Kohli
Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा से मिलती है शांति और साहस, जानें सही विधि और नियम
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Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है, जो साहस और शांति का प्रतीक मानी जाती हैं। इस दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और पीले या लाल वस्त्र धारण कर विधिपूर्वक पूजा करते हैं। मां को चमेली के फूल, सिंदूर और अक्षत अर्पित किए जाते हैं। दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाकर ‘ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः’ मंत्र का जाप किया जाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पूजा विधि का महत्व

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मां चंद्रघंटा की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। यदि घर में मूर्ति स्थापित है तो उसे दूध, केसर और केवड़े के जल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद सफेद कमल या पीले गुलाब अर्पित कर विधिवत पूजा की जाती है, जिससे देवी की कृपा प्राप्त होती है।

भोग और प्रसाद का महत्व

इस दिन दूध से बनी मिठाइयां, खीर या शहद का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसे भोग से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

मंत्र जाप और आरती

पूजा के दौरान ‘ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। अंत में कपूर से आरती कर दुर्गा चालीसा का पाठ किया जाता है, जिससे पूजा पूर्ण होती है।

विशेष धार्मिक मान्यता

इस दिन पूजा के दौरान घंटी बजाना आवश्यक माना गया है। मां चंद्रघंटा के नाम का संबंध उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी से है, जो उनकी पहचान को दर्शाता है।

व्रत के नियम और सावधानियां

व्रत रखने वाले भक्तों को पूरे दिन सात्विक भोजन करना चाहिए, जिसमें फल, दूध और कुट्टू या सिंघाड़े का आटा शामिल होता है। प्याज, लहसुन, साधारण नमक, गेहूं, चावल और बाहर का खाना वर्जित माना गया है। साथ ही इस दिन नींबू, इमली या सूखा नारियल मां को अर्पित नहीं करना चाहिए। यह पूजा शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है।

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