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चंडीगढ़: प्रशासक की चेतावनी नाकाम, डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर कचरे का संकट बरकरार

VVinita Kohli
चंडीगढ़: प्रशासक की चेतावनी नाकाम, डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर कचरे का संकट बरकरार
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चंडीगढ़: डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में वर्षों से जमा कूड़े का पहाड़ अब चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कूड़े के निस्तारण को लेकर समय-समय पर नई डेडलाइन तय की जाती रही हैं और बड़े-बड़े दावे भी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। इस माह 19 जनवरी को डड्डूमाजरा में कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट के शिलान्यास के अवसर पर यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कचरे का निस्तारण हर हाल में 30 जनवरी तक पूरा किया जाए। हालांकि 30 जनवरी की समयसीमा भी बीत चुकी है, लेकिन डंपिंग ग्राउंड में कूड़े का पहाड़ अब भी खड़ा है। इसके चलते आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग बदबू, प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से लगातार जूझ रहे हैं।

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ध्यान रहे कि प्रशासक का शनिवार को डड्डूमाजरा के कम्युनिटी सेंटर में जन सुनवाई कार्यक्रम प्रस्तावित था। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि इस दौरान प्रशासक डंपिंग ग्राउंड का भी दौरा करेंगे, क्योंकि जन सुनवाई में सबसे अधिक शिकायतें इसी मुद्दे को लेकर सामने आने वाली थीं। हालांकि प्रशासक का यह दौरा फिलहाल टल गया है और अब वह 7 फरवरी को डड्डूमाजरा के कम्युनिटी सेंटर में लोगों की समस्याएं सुनेंगे। वहीं दौरे के स्थगित होने से प्रशासन और संबंधित विभागों को एक सप्ताह का अतिरिक्त समय जरूर मिल गया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस अवधि में कूड़े के निस्तारण को लेकर कोई ठोस कार्रवाई होगी या डड्डूमाजरा के लोग एक बार फिर सिर्फ आश्वासनों तक ही सीमित रह जाएंगे।

क्षमता और लक्ष्य के बीच गहरी खाई

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार डंपिंग ग्राउंड पर लगे प्लांट में फिलहाल रोजाना केवल 800 से 1200 मीट्रिक टन कचरे का ही निस्तारण हो पा रहा है। यह आंकड़ा तय लक्ष्य से कई गुना कम है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब मौजूदा क्षमता इतनी सीमित है, तो रोजाना लगभग चार हजार मीट्रिक टन कचरा कैसे प्रोसेस किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मशीनरी, संसाधनों और निगरानी में ठोस इजाफा नहीं किया जाता, तब तक यह लक्ष्य हासिल करना बेहद मुश्किल है।


एनजीटी में किया गया वादा भी अधूरा

डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में भी उठ चुका है। सितंबर 2025 की सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन और नगर निगम ने भरोसा दिलाया था कि 30 नवंबर तक कूड़े का पहाड़ पूरी तरह हटा लिया जाएगा। लेकिन तय समय बीतने के बावजूद अब भी 55 हजार मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस नहीं हो सका। इससे एनजीटी में किए गए वादों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

संसद तक गूंजा डड्डूमाजरा का मुद्दा

डड्डूमाजरा की गंभीर स्थिति संसद तक भी पहुंच चुकी है। हाल ही में लोकसभा में चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी के सवाल के जवाब में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने बताया कि डड्डूमाजरा में अब भी 55,000 मीट्रिक टन कचरा बायोरिमेडिएशन के दायरे में है। मंत्रालय के आंकड़ों और स्थानीय प्रशासन के दावों में अंतर ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।

तीसरे कचरा ढेर पर भी अनिश्चितता

डड्डूमाजरा में मौजूद तीसरे कचरा ढेर में करीब 2.4 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा है। इसके निस्तारण की समय-सीमा भी कई बार बदली जा चुकी है—पहले जुलाई 2025, फिर सितंबर 2025 और बाद में नवंबर 2025। लेकिन अब तक इस ढेर को लेकर कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है। डड्डूमाजरा और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग लंबे समय से बदबू, प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान हैं। हर नई डेडलाइन उनके लिए नई उम्मीद लेकर आती है, लेकिन हर बार वही निराशा हाथ लगती है। अब लोगों की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या कूड़े के पहाड़ का सच में अंत होगा या फिर यह भी सिर्फ एक और अधूरी घोषणा साबित होगी।

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