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Farmer Unions Meeting Chandigarh: अमेरिकी ट्रेड डील के खिलाफ चंडीगढ़ में महापंचायत: 25 जून को किसान भवन में जुटेंगे देशभर के बड़े संगठन

GGaganpreet Kaur
अमेरिकी ट्रेड डील के खिलाफ चंडीगढ़ में महापंचायत: 25 जून को किसान भवन में जुटेंगे देशभर के बड़े संगठन
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ढाड (नरेश ढांडा)। दिल्ली की सीमाओं पर लंबे समय तक चले किसान आंदोलन की गूंज अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि किसान संगठनों ने एक और बड़े मोर्चे की तैयारी शुरू कर दी है। इस बार निशाना किसी घरेलू कानून पर नहीं, बल्कि सात समंदर पार अमेरिका के साथ होने जा रही ‘ट्रेड डील’ पर है। ढाड में भाकियू (चढ़ूनी) की बैठक को संबोधित करते हुए युवा प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट विक्रम कसाना ने इस प्रस्तावित समझौते को लेकर कई गंभीर आशंकाएं जाहिर कीं।

कसाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह तथाकथित व्यापारिक समझौता साधारण दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। उन्होंने बताया कि इसी गंभीर विषय पर आगामी 25 जून को चंडीगढ़ के सेक्टर-35 स्थित किसान भवन में देश के कोने-कोने से किसान, मजदूर और युवा संगठनों के नुमाइंदे जुट रहे हैं, जहां से इस डील के विरोध की अंतिम रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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विदेशी उत्पादों से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा, कर्ज के दलदल में धंसेगा किसान

बैठक में मौजूद किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विक्रम कसाना ने इस डील के आर्थिक गणित को समझाया। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान पहले ही डीजल, खाद और बीजों की बढ़ती कीमतों और फसलों के सही दाम (MSP) न मिलने के कारण कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। ऐसे में अगर अमेरिकी कृषि उत्पादों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के लिए देश के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए गए, तो भारतीय किसान कॉर्पोरेट जगत के सामने टिक नहीं पाएगा।

कसाना ने आगाह किया कि विदेशी डेयरी उत्पाद, अनाज और फल जब भारतीय बाजारों में कम दामों पर डंप किए जाएंगे, तो देश के छोटे और मझोले किसानों की कमर टूट जाएगी। उन्होंने कहा, “यह लड़ाई केवल फसल की कीमत की नहीं है, बल्कि देश की खाद्य संप्रभुता (Food Sovereignty) और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने का अंतिम संघर्ष है।”

छोटे व्यापारियों और मजदूरों से एकजुट होने की अपील

भाकियू नेता ने साफ किया कि इस समझौते की आंच सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा असर छोटे दुकानदारों, आढ़तियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ेगा। जब विदेशी लॉबी का बाजार पर एकाधिकार हो जाएगा, तो स्थानीय रोजगार के अवसर खत्म हो जाएंगे।

यही वजह है कि संगठन ने अब इसे केवल किसानों का मुद्दा न रखकर एक व्यापक जन-आंदोलन बनाने का फैसला किया है। इसके लिए जिला और राज्य स्तर पर टोलियां गठित की जा रही हैं, जो गांवों में जाकर लोगों को इस व्यापार समझौते के खतरों के प्रति सचेत करेंगी। बैठक के अंत में मौजूद किसानों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे किसी भी ऐसी नीति को बर्दाश्त नहीं करेंगे जो कॉरपोरेट के फायदे के लिए देश के अन्नदाता को दांव पर लगाती हो। इस मौके पर क्षेत्र के कई वरिष्ठ किसान नेता, युवा कार्यकर्ता और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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