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Chandigarh News: पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना, कल से शुरू होगा सेल्फ एन्यूमरेशन, घर बैठे भरें पोर्टल पर भरें डाटा

VVinita Kohli
Chandigarh News: पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना, कल से शुरू होगा सेल्फ एन्यूमरेशन, घर बैठे भरें पोर्टल पर भरें डाटा
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चंडीगढ़: जनगणना-2027 को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल प्रणाली के तहत कराई जाएगी, जिसमें नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय में आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनगणना संचालन निदेशक डॉ. नवजोत खोसा और डीसी निशांत कुमार यादव ने इसकी पूरी जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगी, जो देश में पहली बार किया जा रहा है।

इस बार डाटा इकट्ठा करने के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही लोगों को खुद अपनी जानकारी भरने का विकल्प भी दिया गया है। इसके लिए वेब पोर्टल के जरिए ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ की सुविधा उपलब्ध होगी, जो 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक खुला रहेगा। 

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नागरिक निर्धारित अवधि के दौरान आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर जाकर स्व-गणना कर सकते हैं। इस पोर्टल पर 16 भाषाओं में जानकारी भरने की सुविधा होगी और कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। जानकारी भरने के बाद एक यूनिक आईडी जारी होगी। इसके पश्चात गणना कर्मी घर-घर जाकर केवल जानकारी का सत्यापन करेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी। प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि वे इस डिजिटल पहल में बढ़-चढ़कर भाग लें, ताकि जनगणना का कार्य समय पर और सुचारू रूप से पूरा किया जा सके।

डॉ. नवजोत खोसा ने बताया कि जनगणना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना का होगा, जो 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान इमारतों, घरों और परिवारों का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। साथ ही लोगों की रहने की स्थिति, पीने के पानी, शौचालय जैसी सुविधाओं और मकानों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। दूसरे चरण में जनसंख्या की गिनती की जाएगी, जिसे फरवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। शहर में 2045 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक बनाए गए हैं। पहले चरण के लिए 2250 गणनाकार और 375 सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं, जिनमें अधिकतर स्कूल शिक्षक शामिल हैं।

डॉ. नवजोत खोसा ने बताया कि देश में जनगणना की शुरुआत वर्ष 1872 में हुई थी और यह ‘जनगणना अधिनियम 1948’ व ‘जनगणना नियम 1990’ के तहत करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि 2021 की जनगणना कोविड-19 के कारण टाल दी थी। उन्होंने बताया कि कि जनगणना के आंकड़े कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण, नीतिगत निर्णय, आधारभूत संरचना विकास तथा संसाधनों के आवंटन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त, यह निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन तथा अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जनगणना-2027 को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने आम नागरिकों से सक्रिय सहयोग की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि नागरिक जनगणना प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भाग लें, सही एवं सटीक जानकारी प्रदान करें तथा गणनाकर्ताओं को पूर्ण सहयोग दें। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जनगणना के दौरान एकत्रित की जाने वाली सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त यूटी चंडीगढ़ अमनदीप सिंह भट्टी, निदेशक जनसंपर्क राजीव तिवारी तथा चंडीगढ़ प्रशासन एवं जनगणना कार्यालय के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

कल से एक कॉल पर मिलेगी जनगणना की जानकारी

जनगणना-2027 से संबंधित जानकारी, शिकायतों के पंजीकरण एवं सहायता के लिए 16 अप्रैल 2026 से यूटी चंडीगढ़ में राष्ट्रीय टोल-फ्री नंबर (1855) भी संचालित किया जाएगा। इस नंबर के माध्यम से नागरिक हेल्पडेस्क अधिकारियों से संपर्क कर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगे। अधिकारियों ने रेखांकित किया कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय योजना एवं विकास की मजबूत आधारशिला है, जिससे भविष्य की नीतियों और योजनाओं का निर्धारण किया जाता है।

हर घर से 33 सवालों के जरिए जुटेगी अहम जानकारी

जनगणना-2027 के तहत इस बार नागरिकों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनके आधार पर घर, परिवार और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। प्रशासन के अनुसार, इन सवालों का उद्देश्य देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की सटीक तस्वीर तैयार करना है, जिससे भविष्य की नीतियों और योजनाओं को प्रभावी बनाया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि जनगणना के दौरान भवन और मकान से जुड़ी जानकारी जैसे फर्श, दीवार और छत में इस्तेमाल सामग्री, मकान का उपयोग और उसकी स्थिति से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे। 

इसके साथ ही परिवार से जुड़े प्रश्नों में सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम और लिंग, जाति वर्ग, विवाहित दंपतियों की संख्या और स्वामित्व की स्थिति शामिल होगी। इसके अलावा पेयजल, बिजली, शौचालय, स्नानघर, गैस कनेक्शन और खाना पकाने के ईंधन जैसी मूलभूत सुविधाओं से संबंधित जानकारी भी ली जाएगी। आधुनिक सुविधाओं के तहत टीवी, इंटरनेट, मोबाइल, कंप्यूटर, वाहन और अन्य संसाधनों के बारे में भी सवाल पूछे जाएंगे। प्रशासन के अनुसार, इन सभी 33 सवालों के जवाब देना अनिवार्य होगा, ताकि जनगणना के आंकड़े सटीक और उपयोगी बन सकें। इन आंकड़ों का उपयोग विकास योजनाओं के निर्माण, संसाधनों के आवंटन और विभिन्न सरकारी नीतियों के निर्धारण में किया जाएगा।

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