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Chandigarh News: डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड मामले में हाईकोर्ट सख्त, कहा- गंदगी फैलाई है तो सफाई भी नगर निगम ही करेगा

VVinita Kohli
Chandigarh News: डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड मामले में हाईकोर्ट सख्त, कहा- गंदगी फैलाई है तो सफाई भी नगर निगम ही करेगा
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चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड मामले में नगर निगम चंडीगढ़ को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट कहा है कि केवल जमीन समतल कर देने से जिम्मेदारी पूरी नहीं होगी। अदालत ने निर्देश दिए कि डंपिंग ग्राउंड क्षेत्र से दिखाई देने वाला हर प्रकार का कचरा पूरी तरह हटाया जाए और स्थल को पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि डंपिंग ग्राउंड से हुए पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई करना नगर निगम की जिम्मेदारी है। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर “प्रदूषण फैलाने वाला भुगतान करेगा” सिद्धांत लागू किया जा सकता है और बीते वर्षों में हुए पर्यावरणीय नुकसान के लिए जुर्माना भी लगाया जा सकता है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नगर निगम केवल औपचारिक कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। अदालत ने कहा कि पूरे क्षेत्र को पूरी तरह साफ करना और उसे पहले जैसी स्थिति में लाना जरूरी है।

बेंच ने कहा, “यह गंदगी नगर निगम की लापरवाही से फैली है, इसलिए इसकी सफाई की जिम्मेदारी भी निगम की ही है। उन्होंने कहा, “कोर्ट ठेकेदार को नहीं पकड़ेगा। हम आपको पकड़ेंगे। आप यह काम किसी ठेकेदार से करवाते हैं या अपने कर्मचारियों से, यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है। हमें इससे कोई लेना-देना नहीं है।” सुनवाई के दौरान बेंच ने पर्यावरणीय जवाबदेही के सिद्धांत का हवाला देते हुए नगर निकाय से कहा: “प्रदूषण आपने फैलाया है, इसलिए इसका भुगतान भी आप ही करेंगे। ‘प्रदूषक भुगतान करेगा’ का एक सिद्धांत होता है।” बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 मई की तारीख तय की और यह साफ कर दिया कि तब तक उस जगह को पूरी तरह से साफ कर दिया जाना चाहिए। बेंच ने निर्देश दिया कि उस जगह पर बिखरे हुए प्लास्टिक के अवशेषों और पॉलीथीन की थैलियों को भी हटा दिया जाना चाहिए।

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ये सख्त टिप्पणियां तब आईं जब कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम द्वारा जमा की गई तस्वीरों और वीडियो को देखा, और 45 एकड़ में फैली उस जगह की मौजूदा स्थिति के बारे में वरिष्ठ अधिवक्ताओं अमित झांजी और गौरव मोहंता की दलीलें सुनीं। हालांकि नगर निगम ने यह दावा किया कि पुराने कचरे के पूरे ढेर को प्रोसेस कर लिया गया है और कचरे का “99.9 प्रतिशत” हिस्सा हट चुका है, लेकिन पीठ तब तक इस बात से संतुष्ट नहीं हुई, जब तक कि उस पूरे इलाके में कचरा बिखरा हुआ दिखाई देता रहा। नगर निगम के वकील ने कोर्ट को बताया कि जमा हुए कचरे की बायो-माइनिंग और प्रोसेसिंग का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, और अब सिर्फ प्रोसेस किए गए कचरे को वहां से हटाना, बचे हुए प्लास्टिक को अलग करना और उस जगह को पूरी तरह से समतल करना बाकी है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बचा हुआ काम पूरा होने में लगभग 20 से 25 दिन लगेंगे।

उन्होंने बेंच को बताया कि प्रोसेस किए गए कचरे को निपटान के लिए उठाया जा रहा है, इस प्रक्रिया से बनी बायो-सॉइल का इस्तेमाल निचले इलाकों को भरने के लिए किया जा रहा है, और ज़मीन के कुछ हिस्सों को भविष्य की नागरिक उपयोगिता परियोजनाओं के लिए अलग रखा गया है। इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के सहयोग से प्रस्तावित एक सीएनजी प्लांट, साथ ही पेड़ लगाना और कचरा प्रोसेसिंग सुविधाओं का विस्तार शामिल है। बेंच ने कहा, “मानसून आने से पहले, आपके पास बहुत कम समय है। इस इलाके को साफ करें और हमें दिखाएं।” खुद पेश होते हुए, याचिकाकर्ता वकील अमित शर्मा ने नगर निगम के दावों का ज़ोरदार खंडन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करने के बजाय, उसे बस एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा रहा है – जिसमें चंडीगढ़ के दूसरे हिस्सों और आस-पास के इलाकों में ईडब्लयूएस (आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग) वाले इलाके भी शामिल हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि कथित तौर पर ट्रकों में भरकर कचरा दूसरी जगहों पर ले जाया गया है। उन्होंने ऐसे उदाहरण भी दिए जहाँ गाड़ियाँ पलट गईं और चंडीगढ़ के बाहर एफआईआर दर्ज की गईं। जब मुख्य न्यायाधीश ने उनसे इस आरोप को साबित करने के लिए कहा, तो शर्मा ने कोर्ट के सामने रखे गए चंडीगढ़ प्रशासन के “अपने ही रिकॉर्ड” का हवाला दिया। शर्मा ने बेंच से कहा, “मुझे इसे साबित करने की ज़रूरत नहीं है; वे खुद अपनी ही दलीलों के ज़रिए इसे साबित कर रहे हैं।” शर्मा ने कहा, “चंडीगढ़ प्रशासन के अपने ही मिनट्स (बैठक के विवरण) में यह सब दर्ज है। 

मुख्य सचिव उनसे लगातार पूछ रहे हैं कि कचरा दूसरी जगहों पर क्यों फेंका जा रहा है और उसे क्यों जलाया जा रहा है। उनके अपने रिकॉर्ड के मुताबिक, फरवरी 2026 तक भी कचरा फेंकने और जलाने का काम जारी था।” शर्मा ने कहा, “यह एक बहुत ही खतरनाक और धोखेबाज़ रणनीति है। सालों से, वे बस अपने लक्ष्य बदलते रहे हैं। कचरे को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा रहा है, उसका कोई हल नहीं निकाला जा रहा। लोग परेशान हैं – पानी में ज़हर घुल रहा है, हवा में ज़हर है, और पर्यावरण से जुड़े नियमों का मज़ाक उड़ाया जा रहा है।” एक मौके पर, शर्मा ने बेंच से आग्रह किया कि वे वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराएं। उन्होंने तर्क दिया कि इस मुद्दे पर कोई ठोस प्रगति तभी हुई, जब अधिकारियों को कोर्ट में तलब किया गया। 

बेंच ने जवाब दिया कि व्यक्तिगत दोष और व्यापक जवाबदेही से जुड़े सवालों की जांच अंतिम चरण में की जाएगी। लेकिन बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अभी सबसे पहली प्राथमिकता कचरे को हटाना और उस जगह को फिर से पहले जैसा बनाना है। बेंच ने सवाल उठाया कि ऐसी सुविधा एक रिहायशी कॉलोनी के इतने करीब कैसे स्थापित हो गई, और यह टिप्पणी की कि यदि योजना बनाने में कोई त्रुटि हुई है, तो अधिकारियों को उसके लिए जवाब देना होगा।

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