चंडीगढ़: स्कूल परिसरों में मौजूद मृत, खोखले और संभावित रूप से खतरनाक पेड़ों की पहचान एवं जोखिम आकलन को लेकर वन एवं वन्यजीव विभाग, यूटी चंडीगढ़ द्वारा एक तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य स्कूल स्तर पर पेड़ों के वैज्ञानिक मूल्यांकन की क्षमता विकसित करना और संभावित दुर्घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करना था। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने तेज हवाओं, भारी वर्षा और अत्यधिक मौसमीय परिस्थितियों में पेड़ों के गिरने के जोखिम को कम करने के उपायों पर चर्चा की।
प्रतिभागियों को विजुअल ट्री असेसमेंट (वीटीए) सहित विभिन्न वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से पेड़ों में संरचनात्मक कमजोरी की पहचान करने का प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि छत्रभाग का सूखना, छाल का अलग होना, तनों में गुहाएँ, दरारें, कवकीय वृद्धि और जड़ों की अस्थिरता जैसे संकेत संभावित खतरे की ओर इशारा करते हैं। कार्यशाला में मृत एवं कमजोर शाखाओं की पहचान, वृक्ष स्थिरता का आकलन और समय पर आवश्यक कदम उठाने की प्रक्रिया पर भी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के प्रिंसिपलों और इको क्लब प्रभारी शिक्षकों ने भाग लिया। उन्हें अपने संस्थानों में नियमित वृक्ष स्वास्थ्य ऑडिट और निगरानी प्रणाली विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया। तकनीकी सत्र का संचालन प्रोफेसर सतीश नरूला (सेवानिवृत्त, उद्यानिकी) ने किया। इस अवसर पर मेजर जनरल बेवली (सेवानिवृत्त) ने संभावित जोखिमों को कम करने के लिए सुनियोजित निरीक्षण और समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।

