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Chandigarh News: चंडीगढ़ में वर्षों से अटके दो बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली रफ्तार, इस माह शुरू हो सकता है निर्माण

VVinita Kohli
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चंडीगढ़: शहर के दो लंबे समय से रुके बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स में अब गति दिख रही है। करीब सात साल से अटके ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर का निर्माण इस माह शुरू होने की उम्मीद है, जबकि छह साल से लंबित पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी के बीच पेडेस्ट्रियन अंडरपास का निर्माण काम भी इसी महीने शुरू होने की संभावना है। ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर का उद्देश्य शहर के सबसे व्यस्त चौराहों में ट्रैफिक जाम को कम करना है। प्रशासन के अनुसार, जैसे ही इस प्रोजेक्ट का कार्य आवंटित किया जाएगा, इसके तहत छह लेन का फ्लाईओवर, रोटरी और अंडरपास का निर्माण 30 महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। 

वहीं, पीजीआई-पंजाब यूनिवर्सिटी पेडेस्ट्रियन अंडरपास पैदल यात्रियों और छात्रों की सुरक्षा के साथ-साथ दोनों संस्थानों के बीच आसान आवागमन सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है। अंडरपास 16.5 मीटर चौड़ा होगा और 8 दुकानें भी बनाई जाएंगी। ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर के लिए फरवरी के पहले सप्ताह में जारी किए गए टेंडर के बाद इस प्रोजेक्ट के लिए 12 कंपनियों ने बोली लगाई है। हाई-पावर टेक्निकल कमेटी की ओर से इन बोलियों का मूल्यांकन किया जा चुका है। इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही निर्माण कार्य करने वाली एजेंसी का चयन कर लिया जाएगा। इसके बाद इस माह से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। 

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ट्रिब्यून चौक शहर के सबसे व्यस्त जंक्शनों में से एक है, जहां रोजाना भारी संख्या में वाहन गुजरते हैं, जिससे अक्सर लंबा जाम लग जाता है। फ्लाईओवर का उद्देश्य शहर के इस व्यस्त चौराहे पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम को कम करना है। इस प्रोजेक्ट की प्रक्रिया में बार-बार देरी के कारण लागत में भी वृद्धि हुई है। 2019 में इसकी अनुमानित लागत 183.74 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 247.07 करोड़ रुपये हो गई है। ऐसे में सात वर्षों में लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस प्रोजेक्ट का इतिहास भी कई बाधाओं से भरा रहा है। चंडीगढ़ की पूर्व सांसद किरण खेर ने इस फ्लाईओवर को मंजूर करवाया था। खेर के दस साल के कार्यकाल की यह सबसे बड़ी उपलब्धि रही थी। वर्ष 2019 में चुनाव आचार संहिता लगने से पहले 3 मार्च  को तत्कालीन प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने फ्लाईओवर के लिए नींव पत्थर रख दिया था। 

लेकिन उसी साल नवंबर में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पेड़ काटने पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण काम ठप हो गया। चार साल बाद, मई 2024 में यह रोक हटी। हाईकोर्ट ने रोक हटाते समय टिप्पणी की थी कि ऐसे हालात में विकास कार्यों को रोकने के बजाय यातायात सुगम बनाना जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा था कि रोक के कारण चंडीगढ़ लगभग एक दशक पीछे चला गया है ।हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि निर्माण शुरू करने के समय ही पेड़ों की कटाई की जाए और इनके स्थान पर पांच गुना पौधे लगाए जाएं। हालांकि, स्टे हटने के बाद भी प्रक्रिया धीमी रही। इसके बाद इंजीनियरिंग विभाग ने मार्च 2025 में करीब 247.07 करोड़ रुपये की नई लागत का प्रस्ताव भेजा, जिसे जुलाई में मंजूरी मिल गई। इसके बावजूद प्रशासन को टेंडर जारी करने में सात महीने और लग गए।

वहीं, यूटी प्रशासन ने पीजीआई  और पंजाब यूनिवर्सिटी के बीच बनाए जा रहे पेडेस्ट्रियन अंडरपास को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस 12.31 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद लगभग 10,000 लोग इस मार्ग का सुरक्षित उपयोग कर सकेंगे। वर्तमान में पीजीआई और पीयू आने-जाने वाले हजारों लोगों को गाड़ियों की आवाजाही के बीच रोजाना सड़क पार करना पड़ता है। इस दौरान उन्हें काफी मुसीबत झेलनी पड़ती है। यह प्रोजेक्ट 2019 में तत्कालीन यूटी के  प्रशासक वीपी सिंह बदनौर द्वारा मंजूरी दी गई थी। हाल ही में यूटी प्रशासन की एक समीक्षा बैठक में चंडीगढ़ में चल रही प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की समयसीमा तय की गई। इन परियोजनाओं की कुल लागत 550 करोड़ रुपये से अधिक है। अधिकारियों ने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स की नियमित मॉनिटरिंग इस बात को सुनिश्चित करने के लिए की जाती है कि वे समय पर पूरे हों और जनता के धन का सही उपयोग हो।

सात किमी से सिमटकर 1.6 किमी हुआ ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर प्रोजेक्ट

प्रस्तावित 1.6 किलोमीटर लंबा ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर सेक्टर-32 स्थित जीएमसीएच राउंड अबाउट के पास से शुरू होकर दक्षिण मार्ग पर रेलवे ओवरब्रिज तक जाएगा और ट्रिब्यून चौक के ऊपर से गुजरेगा। प्रारंभ में प्रशासन ने 7 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर की योजना बनाई थी, जिसे बाद में घटाकर 3.5 किलोमीटर और अंततः 1.6 किलोमीटर कर दिया गया।प्रतिदिन पांच से छह लाख वाहन दूसरे राज्यों से चंडीगढ़ में प्रवेश करते हैं। बाहरी राज्यों समेत ट्राईसिटी के वाहनों को मिलाकर ट्रिब्यून चौक से भी प्रतिदिन लगभग 1.43 लाख वाहन गुजरते हैं। भारी जाम के कारण दिल्ली और डेराबस्सी से चंडीगढ़ आने वाले वाहन चालकों को कई बार 90 मिनट तक की देरी का सामना करना पड़ता है।

जगह की कमी के चलते अंडरपास से एस्केलेटर हटे, लिफ्ट और रैंप होंगे

पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी के बीच बनाए जा रहे पेडेस्ट्रियन अंडरपास के संशोधित प्रोजेक्ट के तहत अंडरपास में 8 बूथ (2.5 गुणा 2.5 मीटर) बनाए जाएंगे जबकि पहले 20 बूथ प्रस्तावित थे। चौड़ाई 17 मीटर से घटाकर 16.5 मीटर कर दी गई है। सेक्टर-17-रोज गार्डन के अंडरपास के मुकाबले इस अंडरपास की चौड़ाई अधिक होगी। जगह की कमी के कारण एस्केलेटर हटाए गए हैं और अब दोनों ओर लिफ्ट और रैंप बनाए जाएंगे। यह अंडरपास पीयू के पास मौजूद बस स्टॉप और पीजीआई गेट के बीच में बनेगा, जो पीजीआई से जुड़ेगा। 

अंडरपास का निर्माण शुरू होने पर वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के लिए इलाके में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक रूट का अध्ययन किया गया है। गौरतलब है कि शुरुआत में 80 स्क्वायर फीट जमीन मांगी गई थी, लेकिन अंत में 60 स्क्वायर फीट भूमि ही मिल पाई। इसके बाद प्लान को हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी और उसकी सब-कमेटी के पास भेजा गया। जुलाई 2023 में चंडीगढ़ हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी की सब-कमेटी ने अंडरपास के संशोधित डिजाइन को मंजूरी दी थी जबकि पिछले साल अर्बन प्लानिंग विभाग ने ड्रॉइंग को अंतिम मंजूरी दी थी।

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