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चंडीगढ़: कालीबाड़ी में पोइला बैसाख उत्सव, राज्यपाल ने दिया एकता और संस्कृति का संदेश

VVinita Kohli
चंडीगढ़: कालीबाड़ी में पोइला बैसाख उत्सव, राज्यपाल ने दिया एकता और संस्कृति का संदेश
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चंडीगढ़: हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने सोमवार को चंडीगढ़ स्थित कालीबाड़ी में ठाकुर रामकृष्ण की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ के वार्षिक उत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया और बंगाली नववर्ष ‘पोइला बैसाख’ के शुभ अवसर पर प्रदेशवासियों तथा देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर लेडी गवर्नर मित्रा घोष भी उपस्थित रहीं। राज्यपाल ने ‘पोइला बैसाख’ को हर्ष, नवचेतना और नए आरंभ का प्रतीक बताते हुए कहा कि ‘पोइला’ का अर्थ पहला और ‘बैसाख’ बंगाली पंचांग का प्रथम महीना है। यह पर्व आशा, समृद्धि और नई संभावनाओं के आगमन का संदेश देता है।

उन्होंने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि दिवाली, ईद-उल-फितर, क्रिसमस, गुरुपर्व, पोंगल और ‘पोइला बैसाख’ जैसे त्योहार जैसे पर्व धार्मिक सीमाओं से परे जाकर समाज को एकता के सूत्र में बांधते हैं। ये त्योहार आपसी सम्मान, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सद्भाव को बढ़ावा देते हैं तथा ‘विविधता में एकता’ की भारतीय भावना को साकार करते हैं। राज्यपाल ने ‘हल्खाता’ जैसी पारंपरिक प्रथाओं का भी उल्लेख किया, जिसमें व्यापारी नए बही-खाते आरंभ कर समृद्धि की कामना करते हैं। साथ ही उन्होंने ‘चौत्र बिक्री’ से जुड़े उत्सव के उत्साह की चर्चा की। 

उन्होंने कालीबाड़ी, चंडीगढ़ द्वारा भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में निभाई जा रही भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इस अवसर पर राज्यपाल एवं लेडी गवर्नर ने कालीबाड़ी की वार्षिक पत्रिका ‘अपब्रिनु’ का विमोचन किया और उसकी संपादकीय टीम को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में स्वामी शांतत्मानंद जी, स्वामी भीतिहरानंद जी, स्वामी तन्महिमानंद जी, राज्यपाल के निजी सचिव शंख चटर्जी, कालीबाड़ी के अध्यक्ष प्रणोब सेन, प्रभारी अमृता गांगुली, महासचिव राजेश रॉय और कोषाध्यक्ष बी.के. चटर्जी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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