चंडीगढ़ PGI में स्वाइन फ्लू के 36 बच्चे समेत 170 केस, पंजाब से सबसे ज्यादा 68 संक्रमित
चंडीगढ़ PGI में स्वाइन फ्लू के 170 केस
Chandigarh Swine Flu Cases: चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) में स्वाइन फ्लू, H3N2 और इन्फ्लूएंजा-B के मरीजों की संख्या में तेजी दर्ज की गई है। पीजीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 26 अगस्त तक इन तीनों संक्रमणों के कुल 170 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। इनमें करीब 50 प्रतिशत मरीज अकेले अगस्त महीने में मिले हैं। संक्रमितों में 36 बच्चे भी शामिल हैं, जबकि पंजाब से सबसे ज्यादा 68 मरीज इलाज के लिए पीजीआई पहुंचे हैं। बदलते मौसम के बीच फ्लू के इन मामलों में बढ़ोतरी स्वास्थ्य के लिहाज से सतर्क रहने की जरूरत बताती है। पीजीआई में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के मरीज पहुंचे हैं। इससे साफ है कि संस्थान में दर्ज मामले केवल चंडीगढ़ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीज भी यहां इलाज करा रहे हैं।
पीजीआई के आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त तक दर्ज 170 पॉजिटिव मामलों में से करीब आधे मरीज अगस्त में सामने आए हैं। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में अगस्त के दौरान मिले मरीजों की सटीक संख्या नहीं बताई गई है। इसके बावजूद एक ही महीने में मामलों का बड़ा हिस्सा सामने आना संक्रमण के प्रति सतर्कता बरतने की जरूरत को दर्शाता है। इन 170 मरीजों में 83 पुरुष और 87 महिलाएं हैं। दोनों की संख्या लगभग बराबर है। वहीं, 14 साल से कम उम्र के 36 बच्चे भी संक्रमण की चपेट में आए हैं। कुल संक्रमितों में 134 वयस्क हैं, जबकि बच्चों की हिस्सेदारी भी उल्लेखनीय है। पीजीआई ने स्वाइन फ्लू, H3N2 और इन्फ्लूएंजा-B के मामलों को संयुक्त रूप से दर्ज किया है। इसलिए उपलब्ध आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि इन तीनों संक्रमणों में से किसके कितने मरीज मिले हैं। ऐसे में 170 का आंकड़ा तीनों तरह के फ्लू संक्रमणों को मिलाकर है।
पंजाब से सबसे ज्यादा 68 मरीज पहुंचे PGI
पीजीआई में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों में पंजाब के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा रही। यहां से कुल 68 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। इसके बाद हरियाणा से 34 और चंडीगढ़ से 28 मरीज सामने आए हैं। हिमाचल प्रदेश से 20, उत्तर प्रदेश से 10 और अन्य स्थानों से भी 10 मरीज पीजीआई पहुंचे हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि चंडीगढ़ पीजीआई आसपास के कई राज्यों के मरीजों के लिए भी इलाज का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मरीजों की संख्या में पंजाब का हिस्सा सबसे ज्यादा है। वहीं, हरियाणा और चंडीगढ़ से भी बड़ी संख्या में संक्रमित मरीज सामने आए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर संबंधित राज्यों में संक्रमण की कुल दर या वहां के वास्तविक मामलों का आकलन नहीं किया जा सकता, क्योंकि ये केवल पीजीआई में दर्ज मरीजों की संख्या है।
स्वाइन फ्लू, H3N2 और इन्फ्लूएंजा-B जैसे संक्रमणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों को ठंड लगने, कमजोरी और भूख कम लगने की परेशानी भी हो सकती है। सामान्य फ्लू के लक्षण कई बार मौसमी संक्रमण जैसे लगते हैं, इसलिए उन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। खासकर बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या तबीयत बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेना भी नुकसानदायक हो सकता है।
संक्रमण से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
फ्लू के संक्रमण से बचने के लिए नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोना जरूरी है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकना चाहिए। बीमार व्यक्ति के नजदीकी संपर्क से बचने और लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करने से संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। यदि फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें तो आराम करें और दूसरों के संपर्क में आने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों में लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। पीजीआई में 26 अगस्त तक सामने आए 170 पॉजिटिव मामलों में अगस्त की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत रही है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में संक्रमण के अलग-अलग प्रकार के मरीजों की संख्या नहीं दी गई है। ऐसे में बदलते मौसम के दौरान सावधानी बरतना और लक्षण गंभीर होने पर समय पर इलाज कराना जरूरी है।
