Chandigarh transport: चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिक बसों की बैटरी क्षमता घटने से चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) के सामने संचालन की चुनौती खड़ी हो गई है। नवंबर 2021 में शुरू हुई अशोक लेलैंड की 40 इलेक्ट्रिक बसों में से 10 में बैटरी संबंधी समस्या सामने आई है। इन बसों की रेंज फुल चार्ज होने के बाद भी 185 किलोमीटर से घटकर 160 से 170 किलोमीटर रह गई है, जिससे लंबे लोकल रूट पर बसों को बीच में दोबारा चार्ज करना पड़ रहा है। सीटीयू के लिए यह समस्या ऐसे समय सामने आई है, जब शहर में सार्वजनिक परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा बढ़ाया जा रहा है। बैटरी की क्षमता घटने के साथ दो बसों के कंडम होने से उपलब्ध बसों और स्पेयर वाहनों पर भी दबाव बढ़ा है। सीटीयू प्रबंधन अगले सप्ताह कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इस समस्या का समाधान निकालने पर चर्चा करेगा।
10 बसों की रेंज घटी, 270-280 किलोमीटर के रूट पर परेशानी
अशोक लेलैंड की प्रभावित बसें पहले एक बार फुल चार्ज होने पर करीब 185 किलोमीटर चलती थीं। अब इनकी रेंज घटकर 160 से 170 किलोमीटर रह गई है। ऐसे में करीब 270 से 280 किलोमीटर लंबे लोकल रूट पर एक बार चार्ज करने से काम नहीं चल रहा और बसों को दोबारा चार्जिंग के लिए रोकना पड़ रहा है। इसका असर बसों के संचालन की योजना पर पड़ सकता है। रूट की कुल दूरी और एक बार चार्ज करने पर मिलने वाली रेंज के बीच अंतर होने के कारण परिवहन प्रबंधन को चार्जिंग के समय और बसों की उपलब्धता का तालमेल बैठाना पड़ता है। इससे बसों के फेरे और स्पेयर वाहनों की जरूरत भी प्रभावित हो सकती है। गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट वर्कर यूनियन के वाइस प्रेसिडेंट सतिंदर सिंह ने बताया कि नियमों के अनुसार दो बसें स्पेयर रखनी पड़ती हैं। अशोक लेलैंड की दो बसें कंडम हो चुकी हैं, जिससे उपलब्ध स्पेयर बसों की संख्या पर भी असर पड़ा है। यूनियन के मुताबिक, बैटरी की समस्या और स्पेयर बसों की कमी के कारण रूटों पर संचालन प्रभावित हो रहा है।
कंपनी से बैटरी बदलने की मांग, अगले सप्ताह होगी बैठक
सीटीयू के डायरेक्टर अविकेश गुप्ता ने बताया कि बैटरी की समस्या से जूझ रही बसों के संबंध में अगले सप्ताह कंपनी के साथ बैठक की जाएगी। बैठक में बसों के रखरखाव और खराब बैटरियों को बदलने के मुद्दे पर चर्चा होगी। सीटीयू कंपनी से प्रभावित बसों की बैटरियां बदलने के लिए कहेगा। अब तक कंपनी की ओर से बैटरी के तीन सेट भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा 10 और बैटरी सेट मंगवाए जाएंगे। इन बैटरियों को बदलने की प्रक्रिया और प्रभावित बसों की स्थिति पर होने वाली बैठक के बाद ही आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी। गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट वर्कर यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने बताया कि ई-बसों के संचालन में आ रही समस्याओं का मुद्दा सीटीयू सचिव के सामने भी उठाया गया है। उन्होंने मांग की कि बसों के रखरखाव में सामने आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
तीन चरणों में शुरू हुई इलेक्ट्रिक बस सेवा
चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन तीन चरणों में शुरू किया गया। पहले चरण में अशोक लेलैंड की 40 बसें नवंबर 2021 में सड़कों पर उतारी गई थीं। इन बसों की अनुबंध दर 59.98 रुपये प्रति किलोमीटर है और अनुबंध की अवधि 10 साल निर्धारित की गई है। दूसरे चरण में वीई कॉमर्शियल व्हीकल्स की 40 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन अक्टूबर 2022 में शुरू हुआ। इन बसों की अनुबंध दर 44.99 रुपये प्रति किलोमीटर है। इसके बाद प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत मार्च 2026 में 100 नई इलेक्ट्रिक बसें शुरू की गईं। इनकी घोषित रेंज करीब 224 किलोमीटर प्रति चार्ज है और अनुबंध दर 61.80 रुपये प्रति किलोमीटर है। इस तरह चंडीगढ़ में तीनों चरणों को मिलाकर कुल 180 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया गया है। नई बसों की घोषित रेंज और पुराने बेड़े की मौजूदा स्थिति के बीच अंतर को देखते हुए बैटरी की क्षमता और रखरखाव का मुद्दा परिवहन व्यवस्था के लिए अहम बना हुआ है।
अशोक लेलैंड की बसें ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल के तहत संचालित होती हैं। इस मॉडल में अनुबंध की शर्तों के अनुसार बसों की खरीद, रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी कंपनी की होती है। ऐसे में बैटरी की क्षमता घटने और दो बसों के कंडम होने के बाद कंपनी की ओर से समस्या का समाधान करना अहम होगा। सीटीयू प्रबंधन की अगले सप्ताह होने वाली बैठक में बैटरी बदलने और बसों के रखरखाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि प्रभावित बसों को दोबारा बेहतर स्थिति में लाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, बैटरी की कम रेंज और स्पेयर बसों की उपलब्धता चंडीगढ़ की इलेक्ट्रिक बस सेवा के संचालन के सामने प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।

