College Days Viral Post: सोशल मीडिया की वर्चुअल दुनिया में अक्सर ऐसी चीजें वायरल हो जाती हैं जो लोगों को पुरानी यादों में लौटने पर मजबूर कर देती हैं। इन दिनों एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक यूजर की भावुक पोस्ट इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस पोस्ट में यूजर ने अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन से उनकी तुलना की है। (social media viral post) लेखक ने बड़े ही मार्मिक ढंग से बयां किया है कि कैसे जवानी की दहलीज लांघने के बाद जिंदगी के मायने बदल जाते हैं और जिम्मेदारियों का बोझ सुकून को पीछे छोड़ देता है।
जब पिता भरते थे फीस, वो थे जीवन के सबसे बेहतरीन दिन
एक्स पर @volklub नामक हैंडल से साझा की गई इस वायरल पोस्ट में यूजर सुंदरदीप ने अपने शुरुआती दौर को याद किया है। उन्होंने लिखा है कि जब उनके पिता उनकी कॉलेज की फीस चुकाया करते थे, तब का समय उनके जीवन का सबसे सुनहरा दौर था। उस दौर में वे अपनी पसंदीदा प्लेलिस्ट और म्यूजिक का आनंद लेते थे। (old memories college life) सिर्फ 63 प्रतिशत अंकों के साथ कॉलेज में एडमिशन मिलने और हॉस्टल में अपनी एक अलग ही शान होने का जिक्र करते हुए उन्होंने उन दिनों की मासूमियत को याद किया है। भाई के साथ मिलकर डीवीडी प्लेयर पर पंजाबी कलाकारों की कॉमेडी सुनना उनके लिए आज भी एक अनमोल याद है।
20 की उम्र के बाद कैसे बदल जाती है जिंदगी की रफ्तार
पोस्ट का सबसे भावुक हिस्सा वह है जिसमें उम्र के पड़ाव और मानसिक स्थिति की तुलना की गई है। सुंदरदीप ने लिखा है कि उन्हें पता ही नहीं चला कि कब वे 20 साल से सीधे 39 साल के हो गए, लेकिन 20 की उम्र के बाद का जीवन संघर्षों और दुखों से भरा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि पैसा भले ही इंसान के पास आ जाए, लेकिन वह मानसिक सुकून और आंतरिक खुशी नहीं खरीद सकता जो माता-पिता के साये में और उनके सहारे जीने में मिलती थी। यह अहसास कि खाने-पीने की चिंता से परे कोई और आपकी फिक्र कर रहा है, अपने आप में सबसे बड़ा संबल होता है।
सोशल मीडिया पर उमड़ी प्रतिक्रियाएं, यूजर्स ने साझा किए अपने अनुभव
यह पोस्ट सामने आने के बाद से ही इस पर लाइक्स और कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। कई लोगों ने इस भावना से खुद को जोड़ते हुए अपने पुराने दिनों को याद किया है।
एक यूजर ने लिखा कि ऐश असल मायनों में पिता के पैसों पर ही होती है, चाहे इंसान बाद में कितना भी सफल क्यों न बन जाए। (viral emotional post india) वहीं, एक अन्य यूजर ने 90 के दशक और 2000 के शुरुआती दौर को सबसे जादुई बताते हुए कहा कि उस समय भौतिक सुख-सुविधाएं कम होने के बावजूद चेहरों पर असली मुस्कान हुआ करती थी। कई लोगों ने यह भी माना कि पहली नौकरी की छोटी-सी तनख्वाह में जितना सुकून था, आज लाखों कमाने के बाद भी वह गायब है।

