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Multi-modal Hub Delhi:

AAmandeep Singh
दिल्ली को मिलेगा चौथा ISBT: द्वारका में 4200 करोड़ से बनेगा मल्टी-मॉडल हब, एयरपोर्ट और ट्रेन से सीधा जुड़ाव
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दिल्ली। देश की राजधानी में यातायात को सुगम बनाने और अंतरराज्यीय यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं देने के लिए दिल्ली सरकार ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है। द्वारका सेक्टर-22 में प्रस्तावित नया आईएसबीटी (ISBT) दिल्ली के परिवहन इतिहास में मील का पत्थर साबित होने वाला है। परिवहन मंत्री पंकज सिंह के अनुसार, यह टर्मिनल मौजूदा कश्मीरी गेट, आनंद विहार और सराय काले खां टर्मिनलों से कहीं अधिक आधुनिक और सुविधायुक्त होगा। इसे ‘ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ (TOD) की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को एक ही छत के नीचे बस, मेट्रो, ट्रेन और हवाई यात्रा के विकल्प मिल सकें।

लोकेशन ऐसी कि हर सफर होगा आसान

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इस नए हब की सबसे बड़ी खूबी इसकी लोकेशन है। द्वारका का यह सेक्टर-22 टर्मिनल सेक्टर-21 मेट्रो स्टेशन, बिजवासन रेलवे स्टेशन और आईजीआई एयरपोर्ट के बिल्कुल करीब है। इसके अलावा, यशोभूमि (कन्वेंशन सेंटर) के नजदीक होने के कारण यहां बिजनेस यात्रियों की आवाजाही भी सुगम होगी। इस हब के बन जाने से वेस्ट दिल्ली के निवासियों को बस पकड़ने के लिए शहर के दूसरे छोर तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही, दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे से इसकी नजदीकी के कारण हरियाणा के गुरुग्राम और मानेसर जाने वाले यात्रियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।

महज बस अड्डा नहीं, एक ‘मिनी सिटी’ होगा यह हब

सरकार की योजना के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट का दायरा काफी विशाल है। करीब ढाई लाख वर्ग मीटर क्षेत्र को हाउसिंग यानी आवासीय सुविधाओं के लिए आरक्षित किया गया है। कमर्शियल गतिविधियों के लिए 65 हजार वर्ग मीटर की जगह तय की गई है, जहां मॉल, ऑफिस और होटल बनाए जाएंगे। इसके अलावा, 27 हजार वर्ग मीटर में एक अत्याधुनिक डीटीसी बस डिपो भी बनेगा। यात्रियों के लिए वेटिंग प्लाजा, गार्डन, वॉकवे और टिकटिंग के लिए वर्ल्ड क्लास सिस्टम तैयार किया जाएगा।

पुरानी दिल्ली और आनंद विहार को मिलेगी राहत

वर्तमान में दिल्ली के तीनों प्रमुख आईएसबीटी पर बसों और यात्रियों का अत्यधिक दबाव है, जिसकी वजह से रिंग रोड और बाहरी दिल्ली की सड़कों पर अक्सर भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है। द्वारका का यह नया टर्मिनल इस दबाव को साझा करेगा, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार होगा। यह प्रोजेक्ट न केवल दिल्ली की सड़कों से बोझ कम करेगा, बल्कि राजधानी के आर्थिक और व्यावसायिक विकास को भी नई गति देगा। अब बस इंतजार है इस 4200 करोड़ की योजना के धरातल पर उतरने का, जिससे दिल्ली का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह ‘स्मार्ट’ हो जाएगा।

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