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दिल्ली में गाड़ी लाना होगा महंगा: 1 अप्रैल से कमर्शियल वाहनों पर लगेगा भारी 'ग्रीन टैक्स'

AAmandeep Singh
दिल्ली में गाड़ी लाना होगा महंगा: 1 अप्रैल से कमर्शियल वाहनों पर लगेगा भारी 'ग्रीन टैक्स'
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दिल्ली। राजधानी दिल्ली की सड़कों पर रेंगते ट्रैफिक और जहरीली होती हवा को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में प्रवेश करने वाले बाहरी व्यावसायिक वाहनों पर लगने वाले ‘ग्रीन टैक्स’ (ECC) में भारी बढ़ोतरी को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला उन हजारों ट्रक और कमर्शियल वाहन मालिकों के लिए बड़ा झटका है, जो दिल्ली के रास्तों को महज एक राज्य से दूसरे राज्य जाने के लिए शॉर्टकट के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। प्रशासन का साफ संदेश है—अगर दिल्ली की सड़कों का इस्तेमाल करना है, तो इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।

ट्रकों पर सीधे 1400 रुपये की मार, छोटे हाथी पर भी असर

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1 अप्रैल से लागू होने वाली नई दरों के बाद कमर्शियल वाहनों का गणित पूरी तरह बिगड़ जाएगा। अब तक जो भारी ट्रक दिल्ली की सीमा लांघने के लिए 2600 रुपये का भुगतान करते थे, उन्हें अब सीधे 4000 रुपये अपनी जेब से निकालने होंगे। बात सिर्फ बड़े ट्रकों तक सीमित नहीं है; टेंपो और वैन जैसे हल्के व्यावसायिक वाहनों (LMV) के लिए भी शुल्क बढ़ाकर 2000 रुपये के करीब तय कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि इस बढ़ोतरी से दिल्ली में आने वाले आवश्यक सामानों की ढुलाई लागत पर भी असर पड़ सकता है, जिसका सीधा बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

आखिर क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर साल दर साल खतरनाक रिकॉर्ड तोड़ रहा है। अक्सर देखा गया है कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाले भारी वाहन डीजल बचाने के चक्कर में शहर के बीचों-बीच से गुजरते हैं। इससे न केवल रिंग रोड और नेशनल हाईवे पर घंटों का जाम लगता है, बल्कि रात के समय ट्रकों से निकलने वाला धुआं दिल्ली की हवा को और जहरीला बना देता है। अदालत और सरकार का साझा मकसद इन वाहनों को दिल्ली के बाहर बने ‘वेस्टर्न’ और ‘ईस्टर्न’ पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (WPE/EPE) की तरफ धकेलना है।

जाम और धुएं से मुक्ति की कवायद

प्रशासन को उम्मीद है कि जब दिल्ली के अंदर से गुजरना एक्सप्रेसवे के टोल से भी ज्यादा महंगा हो जाएगा, तो वाहन चालक खुद-ब-खुद बाहरी रास्तों का रुख करेंगे। इससे धौला कुआं, आश्रम और मुकरबा चौक जैसे बॉटलनेक पॉइंट्स पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। यह रणनीति ‘पोल्यूटर पेज़’ (प्रदूषण फैलाने वाला ही भुगतान करे) के सिद्धांत पर आधारित है। हालांकि, ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने इस बढ़ोतरी पर चिंता जताई है, लेकिन पर्यावरणविदों ने इसे दिल्ली के फेफड़ों को बचाने के लिए एक अनिवार्य कदम करार दिया है।

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