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Delhi Metro New Rules: मेट्रो ट्रैक पर गिरने का खतरा होगा खत्म, स्वदेशी प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स से लैस होंगे नए कॉरिडोर

AAmandeep Singh
मेट्रो ट्रैक पर गिरने का खतरा होगा खत्म, स्वदेशी प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स से लैस होंगे नए कॉरिडोर
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दिल्ली। दिल्ली मेट्रो (DMRC) ने अपनी तकनीकी क्षमताओं में एक नया अध्याय जोड़ते हुए ‘देसी’ तकनीक की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। दिल्ली की लाइफलाइन कही जाने वाली इस मेट्रो में अब यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा पूरी तरह से भारतीय तकनीक के पास होगा। डीएमआरसी ने तय किया है कि मेट्रो के आगामी चौथे और पांचवें फेज में लगाए जाने वाले प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स (PSD) अब विदेशों से नहीं मंगवाए जाएंगे, बल्कि इनका निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट के तहत देश में ही होगा। अभी तक इन स्क्रीन डोर्स के लिए दिल्ली मेट्रो को विदेशी कंपनियों और उनकी तकनीक पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे लागत और रखरखाव दोनों ही चुनौतीपूर्ण थे।

अंडरग्राउंड पर फुल तो एलिवेटेड पर हाफ-हाइट डोर, सुरक्षा का नया मॉडल

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मेट्रो स्टेशनों पर भीड़ के दौरान होने वाले हादसों और ट्रैक पर गिरने की घटनाओं को रोकने के लिए ये स्क्रीन डोर्स बेहद कारगर साबित होते हैं। नई योजना के मुताबिक, फेज-4 और फेज-5 के तहत बनने वाले सभी भूमिगत (Underground) स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए ‘फुल-हाइट’ स्क्रीन डोर्स लगाए जाएंगे, जो छत तक कवर होंगे। वहीं, ऊपर बने एलिवेटेड स्टेशनों पर ‘हाफ-हाइट’ स्क्रीन डोर्स लगाने का खाका तैयार किया गया है। वर्तमान में मेट्रो के 303 स्टेशनों में से केवल 83 स्टेशनों पर ही हाफ-स्क्रीन और महज 8 पर फुल-स्क्रीन डोर्स लगे हैं, लेकिन आने वाले समय में यह सुरक्षा कवच हर नए स्टेशन का अनिवार्य हिस्सा होगा।

फेज-4 और फेज-5 का विस्तार: इन रूटों पर बढ़ेगी सुविधा

दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार अब 416 किलोमीटर से आगे बढ़ने को तैयार है। चौथे फेज के तहत आरके आश्रम से जनकपुरी वेस्ट, एरोसिटी से तुगलकाबाद और रिठाला से कुंडली जैसे 5 महत्वपूर्ण कॉरिडोर पर काम चल रहा है। वहीं, पांचवें फेज के तीन नए कॉरिडोर को भी हरी झंडी मिल चुकी है। इन नए रूटों पर सफर करने वाले यात्रियों को न केवल बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, बल्कि स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल से उन्हें एक अलग और सुरक्षित एहसास भी होगा। जानकारों का कहना है कि भारत में इन डोर्स का निर्माण शुरू होने से मेट्रो के ऑपरेशनल खर्च में कमी आएगी और कलपुर्जों की उपलब्धता भी आसान हो जाएगी।

तकनीक के साथ अर्थव्यवस्था को भी मिलेगी रफ़्तार

प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स का स्वदेशीकरण केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ी जीत है। इस कदम से देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी और स्किल्ड लेबर के लिए रोजगार के सैकड़ों नए मौके खुलेंगे। एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन और मैजेंटा लाइन के कुछ स्टेशनों पर जो सुविधा अभी तक ‘प्रीमियम’ लगती थी, वह जल्द ही दिल्ली-एनसीआर के हर नए मेट्रो यात्री की पहुंच में होगी। मेट्रो विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी PSD लगने से ट्रेन संचालन में भी सटीकता आएगी, क्योंकि ये डोर्स सिग्नलिंग सिस्टम के साथ तालमेल बिठाकर काम करते हैं, जिससे स्टेशन पर रुकने का समय (Dwell Time) भी कम होता है।

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