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Delhi NCR Truck Strike Palwal: दिल्ली-एनसीआर में 21 मई से तीन दिन का चक्का जाम, ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल से थम जाएगी रफ्तार

AAmandeep Singh
दिल्ली-एनसीआर में 21 मई से तीन दिन का चक्का जाम, ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल से थम जाएगी रफ्तार
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पलवल। दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आने वाले दिनों में आम जनता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्डर्स कांग्रेस ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आगामी 21, 22 और 23 मई 2026 को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी सांकेतिक हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। इस बड़े आंदोलन को सफल बनाने के लिए पलवल ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें चक्का जाम की रणनीतियों पर गहन मंथन हुआ। इस दौरान साफ कर दिया गया कि तीन दिनों तक क्षेत्र में किसी भी कमर्शियल वाहन का संचालन नहीं होने दिया जाएगा।

सप्लाई चेन टूटने का खतरा, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

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देखा जाए तो दिल्ली-एनसीआर की पूरी लाइफलाइन और व्यापारिक नेटवर्क ट्रकों की आवाजाही पर ही टिका हुआ है। रोजमर्रा की जरूरत का राशन, जीवनरक्षक दवाइयां, फल-सब्जियां और फैक्ट्रियों के लिए आने वाला कच्चा माल इन्हीं भारी वाहनों के जरिए गंतव्य तक पहुंचता है। ट्रांसपोर्टर्स की इस देशव्यापी हड़ताल के कारण यदि तीन दिनों तक सड़कों पर ट्रकों के पहिए थमे रहे, तो स्थानीय बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत हो सकती है। इसका सीधा असर आम जनता की जेब और दैनिक जरूरतों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

ईंधन की मार के बीच ग्रीन टैक्स का दोहरा झटका, कारोबार हुआ बेपटरी

ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने सरकार की नीतियों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि ट्रांसपोर्ट व्यवसाय देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर लगातार इस सेक्टर की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने दर्द साझा करते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों, मनमाने टोल टैक्स, महंगे इंश्योरेंस और परमिट फीस ने पहले ही इस धंधे की कमर तोड़ रखी है। रही-सही कसर हाल ही में बढ़ाए गए भारी-भरकम पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क और ग्रीन टैक्स ने पूरी कर दी है, जिससे ट्रांसपोर्टर्स का मुनाफा अब घाटे में बदल चुका है।

‘सरकार के दोहरे मापदंड मंजूर नहीं’, बीएस-6 वाहनों के लिए उठाई आवाज

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ तो प्रशासन हमें आधुनिक और कम प्रदूषण फैलाने वाली तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करता है, और जब हम करोड़ों का निवेश कर गाड़ियां बदलते हैं, तो उन्हीं नए वाहनों पर टैक्स का अतिरिक्त बोझ लाद दिया जाता है। ट्रांसपोर्ट संगठनों ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क और ग्रीन टैक्स में की गई मनमानी बढ़ोतरी को तुरंत वापस लिया जाए। इसके साथ ही प्रदूषण मुक्त बीएस-6 (BS-VI) वाहनों को इन सभी टैक्सों से पूरी तरह मुक्त रखा जाए और इन पर लगाए जा रहे प्रस्तावित प्रतिबंधों पर सरकार दोबारा विचार करे।

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