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Delhi Railway Stations: दिल्ली के इन बड़े रेलवे स्टेशनों के बदल जाएंगे नाम, शकूरबस्ती और बिजवासन की बदलेगी पहचान

AAmandeep Singh
Delhi Railway Stations: दिल्ली के इन बड़े रेलवे स्टेशनों के बदल जाएंगे नाम, शकूरबस्ती और बिजवासन की बदलेगी पहचान
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दिल्ली। सफर के दौरान अक्सर बाहरी राज्यों से आने वाले यात्री दिल्ली के कुछ रेलवे स्टेशनों के नामों को लेकर उलझन में पड़ जाते हैं। इसी भ्रम को दूर करने और रेल बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए रेल मंत्रालय एक बड़ा नीतिगत कदम उठाने जा रहा है। रेलवे के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, राजधानी के शकूरबस्ती और बिजवासन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों के कायाकल्प के बाद अब इनके नाम बदलने की तैयारी अंतिम चरण में है।

वर्तमान नियमों के अनुसार, किसी भी रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का अंतिम अधिकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास सुरक्षित है। हालांकि, बदलते वक्त और प्रशासनिक सहूलियत को देखते हुए रेल मंत्रालय इस पूरी प्रक्रिया में खुद के लिए अधिक अधिकारों की पैरवी कर रहा है, ताकि नाम बदलने के फैसलों में लगने वाले समय को कम किया जा सके।

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शकूरबस्ती बना मेगा टर्मिनल, अब रानी बाग या पंजाबी बाग के नाम से मिल सकती है नई पहचान

कभी बेहद छोटा और उपेक्षित माना जाने वाला शकूरबस्ती रेलवे स्टेशन आज दिल्ली के एक बड़े रेल हब के रूप में विकसित हो चुका है। हाल के वर्षों में हुए विकास कार्यों के चलते यहां प्लेटफॉर्मों की संख्या 3 से बढ़कर 6 हो चुकी है। आने वाले दिनों में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दबाव कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण और लंबी दूरी की ट्रेनों को शकूरबस्ती स्थानांतरित (शिफ्ट) किया जाएगा।

रेलवे के आला अधिकारियों का तर्क है कि ‘शकूरबस्ती’ नाम से किसी प्रमुख कमर्शियल या रिहायशी इलाके की सटीक लोकेशन का अंदाजा नहीं मिलता। यही वजह है कि यात्रियों की सुविधा के लिए इस स्टेशन का नाम बदलकर इसके बिल्कुल पास स्थित ‘रानी बाग’ या ‘पंजाबी बाग’ जैसे रसूखदार और सुप्रसिद्ध इलाकों के नाम पर रखने का प्रस्ताव मेज पर है।

वर्ल्ड क्लास बन रहा बिजवासन; छोटे स्टेशनों के आगे भी जुड़ेगा ‘दिल्ली’ का टैग

दूसरी तरफ, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में स्थित बिजवासन रेलवे स्टेशन को एक चमचमाते हुए वर्ल्ड क्लास टर्मिनल के रूप में ढाला जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो इस साल अक्टूबर तक इस स्टेशन को पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा। योजना के मुताबिक, पुरानी दिल्ली और सराय रोहिल्ला स्टेशन से चलने वाली कुछ ट्रेनों को यहां ट्रांसफर किया जाएगा। यदि इस स्टेशन का मूल नाम नहीं बदला जाता है, तो भी इसके आगे ‘दिल्ली’ शब्द जोड़ना लगभग तय है।

इसके साथ ही, रेलवे दिल्ली के भीतर चलने वाली लोकल और पैसेंजर ट्रेनों के ठहराव वाले स्टेशनों— जैसे सदर बाजार, आदर्श नगर, पटेल नगर और तिलक ब्रिज के नामों के आगे भी ‘दिल्ली’ ब्रांड नेम जोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

नाम बदलने के इस बड़े खेल से आम यात्रियों को क्या होगा फायदा?

एक अनुभवी रेल अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस पूरी कवायद के पीछे केवल राजनीतिक या प्रशासनिक कारण नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे विशुद्ध रूप से यात्रियों की सहूलियत छिपी है। जब किसी छोटे स्टेशन के आगे ‘दिल्ली’ (जैसे- दिल्ली पटेल नगर या दिल्ली तिलक ब्रिज) जुड़ जाता है, तो देश के दूसरे हिस्सों से ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों को यह समझने में रत्ती भर भी संशय नहीं रहता कि यह स्टेशन देश की राजधानी के भीतर ही स्थित है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ट्रेनों के रूट डायवर्जन के समय यात्रियों को अपनी यात्रा प्लान करने में बड़ी आसानी होगी।

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