दिल्ली के शाहदरा जिले के विवेक विहार में एक रिहायशी बिल्डिंग में एसी ब्लास्ट के बाद लगी आग ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया। इस घटना में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 8 फ्लैट पूरी तरह जलकर राख हो गए। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
मौके पर दमकल की 14 गाड़ियां पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। शुरुआती जांच में एसी ब्लास्ट को आग की वजह माना जा रहा है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
एसी में आग लगने की असली वजह क्या होती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक एसी में आग लगने के पीछे सबसे बड़ी वजह खराब वायरिंग और ओवरलोडिंग होती है। लंबे समय तक लगातार एसी चलाने से तार गर्म हो जाते हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है।
अगर एसी की नियमित सर्विसिंग नहीं होती, तो उसमें जमा धूल और गंदगी भी आग को बढ़ावा देती है। सस्ते और घटिया इलेक्ट्रिकल पार्ट्स का इस्तेमाल भी जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।
ब्लास्ट कैसे होता है, कहां होती है चूक?
एसी में ब्लास्ट आमतौर पर कंप्रेसर फेल होने या गैस लीकेज के कारण होता है। जब मशीन के अंदर प्रेशर अचानक बढ़ता है या गैस के साथ स्पार्क होता है, तो विस्फोट हो सकता है।
खराब इंस्टॉलेशन, बिना मानक के रिपेयर और लोकल पार्ट्स का इस्तेमाल इस खतरे को और बढ़ा देता है। कई मामलों में समय पर जांच न होने से छोटी समस्या बड़ा हादसा बन जाती है।
आम लोगों के लिए क्या हैं जरूरी सावधानियां?
घरों में एसी का इस्तेमाल करते समय सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है। हमेशा अच्छी क्वालिटी के एसी और ओरिजिनल पार्ट्स का ही इस्तेमाल करना चाहिए। नियमित सर्विसिंग और वायरिंग की जांच कराना जोखिम को काफी हद तक कम करता है।
एसी को लंबे समय तक ओवरलोड पर न चलाएं और जरूरत पड़ने पर स्टेबलाइजर का इस्तेमाल करें। अगर एसी से किसी तरह की अजीब आवाज या गंध आए, तो तुरंत बंद कर विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।
बढ़ती घटनाएं बढ़ा रहीं चिंता
देशभर में एसी से जुड़ी आग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे साफ है कि लापरवाही और खराब रखरखाव बड़े हादसों की वजह बन रहे हैं।
ऐसे मामलों का असर सीधे आम लोगों की सुरक्षा पर पड़ता है, खासकर गर्मियों में जब एसी का इस्तेमाल बढ़ जाता है। अब जरूरत है कि उपभोक्ता सतर्क रहें और कंपनियां भी सुरक्षा मानकों पर सख्ती बरतें, ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।

