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Delhi Teachers Salary Hike: दिल्ली के शिक्षकों की लॉटरी: ₹18,000 तक बढ़ी सैलरी, सीएम रेखा गुप्ता ने कैबिनेट में लिया बड़ा फैसला

AAmandeep Singh
दिल्ली के शिक्षकों की लॉटरी: ₹18,000 तक बढ़ी सैलरी, सीएम रेखा गुप्ता ने कैबिनेट में लिया बड़ा फैसला
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दिल्ली। राजधानी की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का दावा करने वाली दिल्ली सरकार ने अब शिक्षकों के हितों में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की कैबिनेट ने उन वोकेशनल और ‘समग्र शिक्षा अभियान’ (SSA) के शिक्षकों के मानदेय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी को हरी झंडी दे दी है, जो लंबे समय से अपने वेतन पुनरीक्षण की बाट जोह रहे थे। सरकार के इस फैसले का सबसे सुखद पहलू यह है कि कुछ श्रेणियों में वेतन सीधे 18 हजार रुपये तक बढ़ गया है, जो अनुबंध पर काम करने वाले शिक्षकों के लिए किसी बड़ी दिवाली से कम नहीं है।

वोकेशनल और गेस्ट टीचर्स के आए ‘अच्छे दिन’

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शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो दिल्ली के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक के बच्चों को हुनर सिखाने वाले करीब 1,131 वोकेशनल टीचर्स तैनात हैं। अब तक इन शिक्षकों को महज 20 से 23 हजार रुपये के बीच मानदेय मिलता था, लेकिन कैबिनेट के फैसले के बाद अब उन्हें सीधे 38,100 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।

यही नहीं, समग्र शिक्षा अभियान के तहत उन बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने वाले शिक्षक, जो स्कूल नहीं जा पाते, उनके वेतन में भी बड़ा बदलाव हुआ है। 784 स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर्स पर कार्यरत इन शिक्षकों की सैलरी 21 हजार से बढ़ाकर 35,420 रुपये कर दी गई है।

स्किल इंडिया और शिक्षा की मुख्यधारा पर जोर

दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस फैसले की महत्ता बताते हुए कहा कि ये शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि छात्रों को भविष्य की चुनौतियों और रोजगार के लिए तैयार करते हैं। वोकेशनल टीचर्स छात्रों को प्रैक्टिकल स्किल्स सिखाते हैं, जो आईटीआई (ITI) जैसे संस्थानों में भी बेहद कारगर साबित होते हैं। वहीं, एसएसए शिक्षक उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण हैं जो सामाजिक या आर्थिक कारणों से स्कूल नहीं पहुँच पाते। इन शिक्षकों को आमतौर पर गेस्ट टीचर या कॉन्ट्रैक्ट टीचर के रूप में जाना जाता है, और उनके वेतन में यह सुधार उन्हें मानसिक शांति और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देगा।

सरकार का मानना है कि जब तक शिक्षकों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ नहीं होगी, तब तक ‘शिक्षा मॉडल’ की सफलता अधूरी है। इस फैसले को चुनावी चश्मे से भी देखा जा रहा है, लेकिन शिक्षकों के बीच इस वक्त केवल उत्सव का माहौल है।

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