Devsar Dham Bhiwani: भिवानी जिले के गांव देवसर स्थित प्रसिद्ध देवसर धाम माता मंदिर में शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व पूरी भव्यता के साथ शुरू हो चुका है। मंदिर परिसर रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सज चुका है, और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है।
हालांकि, पर्व के दौरान सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिनों में यहां सबसे भारी भीड़ उमड़ती है, जिसे ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने कमर कस ली है। पुजारी कंवर पाल के अनुसार, इस बार शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक चलेंगे। खास बात यह है कि इस बार पंचांग के अनुसार एक नवरात्रि बढ़ा हुआ है, जिसे धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही उत्तम माना जा रहा है।
एसपी के निर्देश पर तैनात किए गए 88 पुलिस जवान
त्योहार के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और कानून-व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। मंदिर में सुरक्षा के मद्देनजर कुल 88 पुलिस जवानों की अलग-अलग शिफ्ट में ड्यूटियां लगाई गई हैं।
हाल ही में सदर थाना एसएचओ महाबीर सिंह ने खुद मंदिर परिसर का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। मंदिर की तरफ आने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर पुलिस ने नाकाबंदी कर दी है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। इसके अलावा, पूरे मंदिर परिसर को सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है।
यातायात और आवागमन के लिए विशेष योजना
भक्तों की सुविधा के लिए इस बार यातायात प्रबंधन पर खास जोर दिया गया है। माता रानी का मुख्य मंदिर पहाड़ी क्षेत्र में है, जिसके चलते वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित स्टेडियम को पार्किंग और ट्रैफिक पॉइंट बनाया गया है।
इस स्टेडियम से बुजुर्गों और अन्य श्रद्धालुओं को मंदिर तक लाने-ले जाने के लिए ऑटो रिक्शा का विशेष प्रबंध किया गया है। इतना ही नहीं, जो श्रद्धालु चलने-फिरने में असमर्थ हैं या दिव्यांग हैं, उनके लिए प्रशासन और रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से व्हीलचेयर की सुविधा भी सुनिश्चित की गई है। व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए स्थानीय युवाओं को वालंटियर के रूप में तैनात किया गया है।
733 साल पुराना है देवसर धाम का इतिहास
देवसर धाम की मान्यता केवल हरियाणा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों से भी लोग यहां मन्नत मांगने आते हैं। मंदिर के इतिहास के बारे में पुजारी बताते हैं कि यह स्थान लगभग 733 साल पुराना है। लोक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन पीठ की शुरुआत एक बंजारे की गाथा से जुड़ी है।
कहा जाता है कि सदियों पहले एक बंजारा अपनी गायों के साथ इस क्षेत्र से गुजर रहा था और उसकी गायें कहीं खो गईं। रात में देवी मां ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और पहाड़ी में दबी अपनी मूर्ति को बाहर निकालकर स्थापित करने का आदेश दिया। बंजारे द्वारा मूर्ति स्थापित किए जाने के बाद उसकी खोई हुई गायें वापस मिल गईं, तभी से यह स्थान माता के चमत्कारी धाम के रूप में पूजनीय बन गया।
यह भी पढ़ें–Faridabad News: पल्ला इलाके में चलती ब्रेजा कार में लगी भीषण आग, ड्राइवर ने कूदकर बचाई जान

