DGP Gaurav Yadav Statement : चंडीगढ़ स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय से कम से कम दो साल के तय कार्यकाल के लिए नियमित पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त होने के तुरंत बाद 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौरव यादव ने राज्य के अपराधियों और गैंगस्टरों के खिलाफ सीधी जंग का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को जारी एक विशेष वीडियो संदेश में उन्होंने देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बैठे समाज विरोधी तत्वों को कड़ा सबक सिखाने की चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब में शांति, कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश रचने वालों के नापाक मंसूबे किसी भी कीमत पर पूरे नहीं होने दिए जाएंगे।
देश हो या विदेश, कानून के शिकंजे से नहीं बचेंगे अपराधी
डीजीपी गौरव यादव ने अपने संदेश में दोहराया कि राज्य की धरती पर गैंगस्टरों और उनके नेटवर्क के लिए अब कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने कहा कि आपराधिक गिरोहों के सरगना चाहे भारत के किसी भी राज्य में छिपे हों या फिर विदेशी सरजमीं से अपना नेटवर्क चला रहे हों, पंजाब पुलिस का शिकंजा उन तक जरूर पहुंचेगा। आने वाले दिनों में संगठित अपराध और गैंगस्टर तंत्र को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस विभाग अपनी कार्रवाई को और अधिक धार देगा।
‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान को अंजाम तक पहुँचाने का संकल्प
पुलिस प्रमुख ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हाल ही में संपन्न हुई उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के फैसलों का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता नशे के कारोबार पर पूरी तरह नकेल कसना है, जिसके लिए ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ मुहीम को अंतिम अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। इस अभियान में पंजाब पुलिस, सरकार के तमाम नागरिक विभाग और आम जनता एकजुट होकर नशा तस्करों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करेंगे।
प्रकाश सिंह केस की सिफारिशों के तहत दो साल का मिला कार्यकाल
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले 1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी गौरव यादव जुलाई 2022 से पंजाब पुलिस के कार्यकारी डीजीपी के रूप में कमान संभाल रहे थे। सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक प्रकाश सिंह केस के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यूपीएससी ने 1 जुलाई 2026 को तीन अधिकारियों का एक विशेष पैनल तैयार किया था। गृह विभाग ने इसी पैनल पर विचार करने के बाद शुक्रवार को उनकी नियमित नियुक्ति का पत्र जारी कर दिया, जिसके तहत उनका कार्यकाल पदभार संभालने के दिन से कम से कम दो साल का रहेगा।
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