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Dhami Cabinet Decision; उत्तराखंड में 'नो व्हीकल डे' का ऐलान: धामी कैबिनेट ने ईंधन बचाने के लिए लिए ऐतिहासिक फैसले

AAmandeep Singh
उत्तराखंड में 'नो व्हीकल डे' का ऐलान: धामी कैबिनेट ने ईंधन बचाने के लिए लिए ऐतिहासिक फैसले
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देहरादून। वैश्विक स्तर पर गहराते ऊर्जा संकट और ईंधन की आसमान छूती कीमतों के बीच उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक बेहद साहसिक और दूरगामी फैसला लिया है। बुधवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि ऊर्जा संरक्षण की शुरुआत अब सत्ता के गलियारों से होगी। राज्य में ईंधन और बिजली की बचत के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ से लेकर ‘नो व्हीकल डे’ जैसे सख्त प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।

खुद से शुरुआत: मंत्रियों के काफिले पर चली कैंची

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मुख्यमंत्री धामी ने बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी तंत्र को फिजूलखर्ची रोकनी होगी। अब मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वाहन बेड़े (फ्लीट) में गाड़ियों की संख्या को आधा कर दिया गया है। इतना ही नहीं, सरकार अब हर हफ्ते एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाएगी। इस खास दिन पर मुख्यमंत्री समेत तमाम मंत्री और अधिकारी दफ्तर जाने के बजाय घर से ही काम (Work From Home) करेंगे। आम जनता से भी अपील की गई है कि वे स्वेच्छा से सप्ताह में एक दिन निजी वाहनों का त्याग करें।

‘एक अधिकारी, एक गाड़ी’ और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर

प्रशासनिक सुधारों की फेहरिस्त में ‘एक अधिकारी, एक वाहन’ की नीति सबसे अहम है। अब उन रसूखदार अधिकारियों पर लगाम कसी जाएगी जो एक से अधिक विभागों का जिम्मा होने पर कई सरकारी गाड़ियां इस्तेमाल करते थे। अब नियम साफ है—विभाग चाहे जितने हों, गाड़ी एक ही मिलेगी। साथ ही, परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सार्वजनिक बसों की संख्या और फेरे बढ़ाए जाएं ताकि लोग अपनी कारों के बजाय सरकारी बस का रुख करें।

नई ईवी पॉलिसी: सरकारी खरीद में 50% इलेक्ट्रिक वाहन अनिवार्य

पर्यावरण और जेब दोनों को राहत देने के लिए धामी कैबिनेट ने नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी को हरी झंडी दे दी है। अब भविष्य में सरकार जो भी नई गाड़ियां खरीदेगी, उनमें से आधी अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक होंगी। पूरे प्रदेश में चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाने के लिए युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

विदेशी दौरों पर रोक और ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान

सरकारी खजाने पर बोझ कम करने के लिए मंत्रियों और अधिकारियों की विदेशी यात्राओं को अब सीमित कर दिया गया है। इसकी जगह सरकार ‘विजिट माई स्टेट’ और ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देगी। प्रवासियों को उत्तराखंड बुलाने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था की जा रही है ताकि प्रदेश की आर्थिकी को मजबूती मिले।

जन-जागरूकता: सोना कम खरीदें, सेहत सुधारें

कैबिनेट ने एक अनोखी पहल करते हुए नागरिकों से अपील की है कि वे कम से कम एक साल तक सोने (Gold) की खरीद को सीमित रखें, ताकि आर्थिक दबाव को कम किया जा सके। इसके साथ ही, ‘कम तेल, बेहतर सेहत’ अभियान के जरिए खाद्य तेल की खपत घटाने पर जोर दिया गया है। स्कूलों और सरकारी कैंटीनों के मेन्यू की समीक्षा होगी और ढाबा संचालकों को ‘लो-ऑयल मेन्यू’ रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

स्वच्छ ऊर्जा का रोडमैप

उत्तराखंड अब पीएनजी (PNG) और सौर ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ाएगा। ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना’ के तहत छतों पर सोलर पैनल लगाने के काम में तेजी लाई जाएगी। माइनिंग और पावर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने के लिए समय सीमा तय कर दी गई है—अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति को 60 दिनों के भीतर हर हाल में प्रस्तावों पर फैसला लेना होगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के तनाव ने सप्लाई चेन को तोड़ दिया है। ऐसे में “मेरा भारत, मेरा योगदान” अभियान के तहत छोटे-छोटे बदलाव ही उत्तराखंड को इस वैश्विक संकट से उबारने में मदद करेंगे।

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