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Dhumavati Jayanti 2026 Date: इस साल जून में किस तारीख को है धूमावती जयंती? नोट करें पूजा का सही मुहूर्त

AAmandeep Singh
Dhumavati Jayanti 2026 Date: इस साल जून में किस तारीख को है धूमावती जयंती? नोट करें पूजा का सही मुहूर्त
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धर्म। भारतीय अध्यात्म और सनातन साधना पद्धति में गुप्त शक्तियों और महाविद्याओं का स्थान बेहद गूढ़ माना गया है। इन्हीं सर्वोच्च शक्तियों में से एक माता धूमावती के प्राकट्य का उत्सव यानी धूमावती जयंती इस बार जून के महीने में आ रही है। पंचांगीय गणना के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 21 जून 2026 को दोपहर 3:20 बजे से हो जाएगा, जो अगले दिन यानी 22 जून को दोपहर 3:39 बजे तक जारी रहेगा। सनातन धर्म में उदया तिथि की महत्ता सर्वोपरि है, इसलिए सूर्योदय कालीन तिथि को आधार मानते हुए धूमावती जयंती का महापर्व 22 जून को ही मनाया जाएगा। इस दिन अल सुबह किए जाने वाले जप, तप और अनुष्ठान साधक को अमोघ फल प्रदान करते हैं।

सांसारिक मोह से मुक्ति और केतु दोष निवारण का माध्यम

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आमतौर पर देवी-देवताओं के सौम्य और आभूषणों से सुसज्जित स्वरूपों की पूजा की जाती है, लेकिन माता धूमावती का स्वरूप इसके बिल्कुल विपरीत है। वे एक ऐसी वृद्धा देवी के रूप में वर्णित हैं जो केवल श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, उनके बाल बिखरे होते हैं और वे एक कौवे पर विराजमान रहती हैं। पहली नजर में यह स्वरूप भले ही डरावना या रूखा लगे, लेकिन इसके पीछे जीवन का वह कड़वा सत्य छिपा है जहां व्यक्ति भौतिक सुखों, सज-धज और झूठे अहंकार को छोड़कर परम सत्य की ओर बढ़ता है। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के मुताबिक, जिनकी कुंडली में केतु ग्रह नीच का होकर तबाही मचा रहा हो या जो लोग लंबे समय से पितृ दोष के कारण तरक्की के लिए तरस रहे हों, उनके लिए इस दिन की गई गुप्त साधना जीवन की दिशा बदल सकती है।

कैसे करें माता धूमावती की साधना?

चूंकि माता धूमावती को धुएं के स्वरूप और वैराग्य की देवी माना जाता है, इसलिए इनकी पूजा के नियम सामान्य देवियों से थोड़े भिन्न हैं। इस दिन साधक को सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद हल्के या सफेद रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा के लिए घर का कोई एकांत कोना या मंदिर का शांत स्थान सबसे उपयुक्त रहता है। माता की कृपा पाने के लिए पूजा में काले तिल, साबुत उड़द, उड़द से बने व्यंजन और वस्त्र अर्पित करने का विधान है। पूजा के दौरान पूरी एकाग्रता के साथ ‘ॐ धूं धूमावत्यै नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए। माना जाता है कि इस अनुष्ठान से घर के भीतर मौजूद हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता का समूल नाश हो जाता है।

संघर्षों से जूझने की ताकत देता है यह पर्व

धूमावती जयंती महज एक पारंपरिक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह इंसानी जीवन को गहरे दर्शन से जोड़ती है। जीवन में जब चारों तरफ से परेशानियां घेर लें, आर्थिक तंगी से रास्ते बंद हो जाएं और मानसिक तनाव चरम पर हो, तब माता धूमावती की आराधना इंसान के भीतर सोया हुआ हौसला जगाती है। इनका यह रहस्यमयी स्वरूप यह सीख देता है कि जीवन का बुरा दौर हमेशा के लिए नहीं रहता और विपरित परिस्थितियां ही मनुष्य को अंदर से मजबूत बनाकर आत्मज्ञान के शिखर पर ले जाती हैं।

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