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डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम: "समझौता करो वरना कहर टूटेगा", खाड़ी में युद्ध की आहट

AAmit Gupta
डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम: "समझौता करो वरना कहर टूटेगा", खाड़ी में युद्ध की आहट
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दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए तेहरान को सीधा और कड़ा संदेश भेजा है। ट्रंप ने लिखा कि ईरान के पास समझौता करने या इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए अब केवल 48 घंटे का समय बचा है। समय समाप्त होते ही ईरान पर ‘कहर’ टूटेगा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब 26 मार्च को दी गई 10 दिनों की राहत की अवधि सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रही है।

ईरान का पलटवार: इराक को मिली छूट, दुश्मनों के लिए रास्ते बंद

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ट्रंप की धमकी के बीच ईरानी सैन्य कमान ‘खातम अल-अनबिया’ ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसला लिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने संकेत दिया है कि वह इराक के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देना जारी रखेगा। गौर करने वाली बात यह है कि 80 के दशक में इराक और ईरान के बीच 8 साल तक खूनी जंग चली थी, लेकिन मौजूदा हालात में ईरान इराक को राहत देकर क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश कर रहा है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरानी जलक्षेत्र से केवल उन जहाजों को गुजरने दिया जाएगा जो ‘दुश्मन देशों’ की श्रेणी में नहीं आते और जिनके पास तेहरान की औपचारिक स्वीकृति होगी।

सोमवार रात 8 बजे खत्म हो रही है डेडलाइन

ट्रंप ने पहले राजनयिक वार्ता का हवाला देते हुए ईरानी ऊर्जा बुनियादी ढांचे और बिजली संयंत्रों पर हमलों को टालने का निर्देश दिया था। ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने दावा किया था कि तेहरान के अनुरोध पर उन्होंने 6 अप्रैल 2026 की रात 8 बजे (पूर्वी समयानुसार) तक सैन्य कार्रवाई रोकी हुई है। ट्रंप के अनुसार, बातचीत ‘बहुत अच्छी’ चल रही थी, लेकिन अब उनका लहजा बदल चुका है। राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है कि अगर तय समय के भीतर उनकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो अमेरिकी युद्ध विभाग (Department of War) ईरानी ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने के लिए स्वतंत्र होगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल पर संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कच्चे तेल की सप्लाई का सबसे प्रमुख केंद्र है। यदि ट्रंप अपनी धमकी पर अमल करते हैं या ईरान इस रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक करता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि हमारी ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है। ट्रंप का अल्टीमेटम केवल ईरान के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। अब सबकी नजरें 6 अप्रैल की रात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति काम करेगी या खाड़ी क्षेत्र में एक और बड़ा युद्ध शुरू होगा।

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