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स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के प्रभावी इस्तेमाल में नैतिकता महत्वपूर्ण: जितेंद्र सिंह

JJagmarg Desk
स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के प्रभावी इस्तेमाल में नैतिकता महत्वपूर्ण: जितेंद्र सिंह
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नयी दिल्ली: विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभावी इस्तेमाल में नैतिकता की भूमिका बेहद अहम होगी।

सरकार के बहुभाषी एआई इंजन ‘भारतजेन’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार किसी भी नयी पहल या उभरती तकनीक के प्रारंभिक चरण में ही आगे आकर भूमिका निभाने के लिए तैयार है। मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का अधिकतम और सही उपयोग सुनिश्चित करने में नैतिक मानदंडों की भूमिका बेहद अहम होगी। वह एआई इम्पैक्ट समिट के एक सत्र में बोल रहे थे।

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सिंह ने कहा कि ‘भारतजेन’ सरकारी स्वामित्व वाला संप्रभु मॉडल है, लेकिन निजी क्षेत्र में भी डिजिटल स्वास्थ्य और डिजिटल केस हिस्ट्री जैसे मॉडल पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हमें भी एकीकृत होना पड़ेगा। न तो वे अकेले काम कर सकते हैं, न ही हम। इसलिए, हमें इसके लिए तैयार रहना होगा।

अक्टूबर 2024 में शुरू की गई भारतजेन एक सरकारी परियोजना है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करना है। यह मॉडल भारतीय भाषाओं के लिए ऑटोमेटिक स्पीच रिकग्निशन (एएसआर) और टेक्स्ट-टू-स्पीच (टीटीएस) जैसी सेवाएं प्रदान करेगा।

इस सत्र में, भारतजेन ने अपने नए 17 बी (अरब) पैरामीटर वाले एलएलएम (बड़े भाषा मॉडल) का अनावरण किया। वर्तमान में, भारतजेन के एआई मॉडल हिंदी, असमिया, बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, मैथिली, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, तमिल और तेलुगु सहित कई भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं।

भारतजेन ने आयुर्वेद (आयुर परम), भारतीय कृषि (कृषि परम) और भारतीय विधि क्षेत्र (कानूनी परम) के लिए विशिष्ट रूप से तैयार किए गए मॉडल जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त, भारतजेन के सभी मॉडल (पाठ, वाक् और दृश्य) स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा और शासन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग के लिए उपयोगी हैं। भारतजेन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ऋषि बल ने कहा कि परम2 ‘विशेषज्ञों का मिश्रण’ मॉडल है जिसे 22 भारतीय भाषाओं में काम करने के लिए बनाया गया है।

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