Fake Loan Apps Scam: डिजिटल दौर में ऑनलाइन ठगी के नए-नए और खौफनाक तरीके सामने आ रहे हैं। मोबाइल की स्क्रीन पर दिखने वाले ‘चुटकियों में लोन’ के लुभावने विज्ञापनों के पीछे अब साइबर अपराधियों का एक ऐसा काला साम्राज्य चल रहा है, जो लोगों की इज्जत और जिंदगी दोनों से खेल रहा है। इस गंभीर खतरे को भांपते हुए कैथल जिला पुलिस ने एसपी मनप्रीत सिंह सुदन के आदेशानुसार एक विशेष एडवाइजरी जारी की है, जिसमें आम जनता को फर्जी लोन एप्लीकेशन से सतर्क रहने की सख्त हिदायत दी गई है।
पुलिस के मुताबिक, आजकल तमाम लोग पैसों की जरूरत या आसानी के चक्कर में इन फर्जी ऑनलाइन लोन ऐप के झांसे में फंसते चले जा रहे हैं। ये ठग ऐप डाउनलोड कराते वक्त यूजर से ऐसे परमिशन ले लेते हैं, जिससे फोन का पूरा कंट्रोल और पर्सनल डेटा इनके सर्वर तक पहुंच जाता है। इसके बाद शुरू होता है ब्लैकमेलिंग का असली खेल। जैसे ही कोई व्यक्ति समय पर किश्त या ब्याज नहीं चुका पाता, ये फर्जी कंपनियां यूजर की फोटो से छेड़छाड़ करके उन्हें अश्लील और आपत्तिजनक रूप दे देती हैं।
रिश्तेदारों और दोस्तों को भेजे जाते हैं गंदे मैसेज
इन ठगों का आतंक यहीं नहीं रुकता। आरोपी पीड़ित के मोबाइल में सेव कॉन्टैक्ट्स यानी रिश्तेदारों, दोस्तों और सहयोगियों के नंबरों पर उन आपत्तिजनक तस्वीरों को भेजकर सार्वजनिक करने की धमकी देते हैं। इतना ही नहीं, रिकवरी एजेंट कॉल्स पर गंदी गालियां और अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। बदनामी के इस भारी मानसिक दबाव और डिप्रेशन के चलते कई लोग ऐसा खौफनाक कदम उठा लेते हैं, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।
पुलिस ने तफ्तीश में पाया है कि यदि कोई ग्राहक पूरी मूल रकम और किश्त चुका भी देता है, तब भी ये फर्जी ऐप वाले अपनी मनगढ़ंत रसीदें दिखाकर और ज्यादा पैसों की मांग करते हैं। महज छह-सात दिनों के भीतर ही लोन की मूल राशि से दोगुना ब्याज वसूला जाने लगता है। जब पीड़ित खुद को पूरी तरह घिरा हुआ महसूस करता है, तो वो मानसिक तनाव के कारण चरम स्थिति की ओर बढ़ने लगता है।
डरे नहीं, तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर करें कॉल
कैथल पुलिस ने साफ शब्दों में आमजन से अपील की है कि अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हो रहा है, तो बिल्कुल न डरें और न ही घबराएं। ये अपराधी सिर्फ डर का फायदा उठाते हैं। यदि कोई लोन ऐप या उसका रिकवरी एजेंट आपको या आपके परिवार को ब्लैकमेल कर रहा है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा, तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर साइबर हेल्प डेस्क की मदद लें, ताकि इन ठगों के नेटवर्क को समय रहते सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सके।
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