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Faridabad Fire News: प्रदूषण का नया केंद्र बना फरीदाबाद का इंडस्ट्रियल एरिया, खाली प्लॉट में फेंके कचरे में लगी आग

AAmandeep Singh
प्रदूषण का नया केंद्र बना फरीदाबाद का इंडस्ट्रियल एरिया, खाली प्लॉट में फेंके कचरे में लगी आग
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फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद के माथे पर लगा प्रदूषण का कलंक धुलने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार दोपहर को सेक्टर-58 के इंडस्ट्रियल एरिया में एक बार फिर लापरवाही का ‘काला धुआं’ देखने को मिला। यहाँ एक खाली पड़े प्लॉट में भारी मात्रा में फेंके गए केमिकल कचरे में अचानक आग लग गई। चिलचिलाती धूप और तेज हवाओं ने आग में घी का काम किया, जिससे देखते ही देखते लपटें विकराल हो गईं और आसमान में धुएं की ऐसी चादर बिछ गई कि दिन में ही अंधेरा महसूस होने लगा।

कर्मचारियों की मुस्तैदी ने बचाया बड़ा हादसा

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गनीमत यह रही कि आग की उठती लपटों को देख आसपास की फैक्ट्रियों के कर्मचारी तुरंत हरकत में आ गए। दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही पड़ोसी कंपनियों ने अपने निजी फायर हाइड्रेंट सिस्टम और पानी की पाइपें खोल दीं। तेज हवाओं के कारण डर था कि आग कहीं बगल की बड़ी कंपनियों को अपनी चपेट में न ले ले, लेकिन कर्मचारियों की जांबाजी से वक्त रहते इसे फैलने से रोक लिया गया।

झाड़सेंतली जैसे गांवों पर मंडरा रहा है मौत का साया

यह महज एक आगजनी की घटना नहीं है, बल्कि फरीदाबाद के पारिस्थितिकी तंत्र पर एक गहरा प्रहार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक कचरे को ठिकाने लगाने के बजाय उसे खाली प्लॉटों में फेंकना और फिर उसमें आग लगाना यहाँ की एक पुरानी और खतरनाक परंपरा बन चुकी है। इसका खामियाजा आसपास के गांव भुगत रहे हैं। झाड़सेंतली जैसे नजदीकी गांवों में कैंसर और सांस की गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामले इस ‘जहरीली हवा’ की भयावहता की तस्दीक करते हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

सेक्टर-58 के निवासियों और कामगारों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय प्रशासन इस तरह की अवैध डंपिंग पर आंखें मूंदे बैठा है। केमिकल कचरे में आग लगने से निकलने वाला धुआं साधारण नहीं होता, इसमें कई कार्सिनोजेनिक (कैंसरकारी) तत्व होते हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है या फिर औद्योगिक विकास की आड़ में आम आदमी के फेफड़ों को छलनी करने की खुली छूट दे दी गई है?

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