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Ajab Gajab News: जब व्हेल मछली जिंदा निगल गई मछुआरा, 40 सेकंड मौत के मुंह में बिताकर ऐसे बची जान

AAmandeep Singh
Ajab Gajab News: जब व्हेल मछली जिंदा निगल गई मछुआरा, 40 सेकंड मौत के मुंह में बिताकर ऐसे बची जान
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सोचिए, आप समंदर की असीम गहराइयों में तैर रहे हों और अचानक चारों तरफ घाना अंधेरा छा जाए। आपको लगने लगे कि जिंदगी का सफर अब बस चंद सांसों का ही मेहमान है, लेकिन कुछ ही पलों बाद आप कुदरत के किसी बड़े करिश्मे की बदौलत मौत के मुंह से सही-सलामत बाहर आ जाएं। यह किसी हॉलीवुड फिल्म की काल्पनिक पटकथा नहीं, बल्कि अमेरिकी मछुआरे माइकल पैकर्ड के साथ घटी वो सच्ची घटना है, जिसने पूरी दुनिया के समुद्र वैज्ञानिकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया था।

केप कॉड के ठंडे पानी में हुआ था सामना, लगा कि शार्क ने दबोच लिया

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वाकया साल 2021 के जून महीने का है। रोज की तरह 56 साल के पेशेवर गोताखोर माइकल पैकर्ड केप कॉड के ठंडे समंदर में लॉबस्टर (झींगा मछली) पकड़ने के लिए उतरे थे। माइकल पानी की सतह से करीब 45 फीट नीचे थे, तभी अचानक पानी की लहरों में एक भयानक हलचल हुई। माइकल को अपनी पीठ पर एक जोरदार झटका महसूस हुआ और अगले ही पल उनकी आंखों के सामने मुकम्मल अंधेरा छा गया। उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए पैकर्ड बताते हैं कि उन्हें लगा किसी आदमखोर शार्क ने उन पर हमला कर दिया है। वे बस बेबसी से अपनी मौत का इंतजार करने लगे थे।

दांत नहीं थे, सिर्फ भारी दबाव था; तब खुला कुदरत का रहस्य

मगर कुछ ही सेकंड बाद माइकल को अहसास हुआ कि उनके शरीर पर किसी दांत के निशान या घाव नहीं बन रहे थे। इसके बजाय, उन्हें अपने चारों तरफ एक बेहद भारी दबाव और अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी। वे भांप गए कि वे किसी शार्क का निवाला नहीं बने हैं, बल्कि समंदर के सबसे विशाल जीवों में से एक—हंपबैक व्हेल के मुंह के अंदर बंद हो चुके हैं। उनके पास सांस लेने के लिए स्कूबा गियर तो था, लेकिन उस घने अंधेरे में जो मानसिक खौफ था, उसकी कल्पना भी रूह कंपा देने वाली है।

जब व्हेल को महसूस हुई ‘गलती’, हवा में उछलकर वापस आई जिंदगी

करीब 30 से 40 सेकंड बीतने के बाद शायद उस विशालकाय व्हेल को भी यह अहसास हो गया कि उसने अनजाने में कुछ ऐसा मुंह में डाल लिया है, जो उसका भोजन नहीं है। व्हेल तुरंत तेजी से समंदर की सतह की तरफ ऊपर उठी, पानी से बाहर आकर अपना भारी-भरकम सिर झटका और माइकल पैकर्ड को हवा में उछालते हुए वापस लहरों के बीच फेंक दिया। पैकर्ड के साथी मछुआरों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें पानी से बाहर निकाला और नजदीकी अस्पताल ले गए।

डॉक्टर और वैज्ञानिक भी रह गए दंग, जानिए क्यों इंसान को निगल नहीं सकती व्हेल

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों के लिए भी यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। इतनी बड़ी व्हेल के मुंह में दबने के बावजूद माइकल की एक भी हड्डी नहीं टूटी थी, शरीर पर सिर्फ कुछ खरोंचें और मामूली चोटें आई थीं। डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद उसी दिन डिस्चार्ज कर दिया। जब यह वाकया दुनिया के सामने आया, तो समुद्र वैज्ञानिकों ने साफ किया कि हंपबैक व्हेल का आकार भले ही किसी इमारत जितना बड़ा हो, लेकिन उनका गला बहुत संकरा होता है। वे केवल छोटी मछलियों को ही निगल सकती हैं। असल में व्हेल पानी में मुंह खोलकर शिकार कर रही थी और माइकल अनजाने में उसकी चपेट में आ गए थे।

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