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कश्मीर की पांच हिमनद झीलों में बाढ़ का खतरा ‘बहुत ज्यादा’ : उमर

JJagmarg Desk
कश्मीर की पांच हिमनद झीलों में बाढ़ का खतरा ‘बहुत ज्यादा’ : उमर
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जम्मू: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि कश्मीर हिमालय में कम से कम पांच हिमनद झीलों में हिमनद झील में विस्फोट से बाढ़ (जीएलओएफ) का खतरा बेहद अधिक है, भले ही वे तत्काल अस्थिर स्थिति में न हों।

उमर ने विधानसभा सत्र में कहा कि निचले इलाकों में हिमनद झीलों के प्रभाव का मानचित्रण करने के लिए एक प्रारंभिक भू-स्थानिक विश्लेषण किया गया, जिसमें गांदरबल, शोपियां और कुलगाम जैसे जिलों में संभावित बाढ़ मार्गों पर स्थित बस्तियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की पहचान हुई।

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कश्मीर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने झील के विस्तार की दर, बांध की स्थिरता और आसपास की स्थितियों जैसे जल-भूआकृतिक संकेतकों का इस्तेमाल करके 155 हिमनद झीलों का आकलन किया। उनका अध्ययन ‘जर्नल ऑफ ग्लेशियोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ।

अध्ययन के मुताबिक, हिमनद झील के फटने से आने वाली भीषण बाढ़ की स्थिति में लगभग 2,704 इमारतें, 15 प्रमुख पुल, सड़क खंड और कम से कम एक जलविद्युत परियोजना प्रभावित हो सकती है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) विधायक तनवीर सादिक ने एक सवाल के जवाब में बताया, “अध्ययन में ब्रमसर, चिरसर, नुंदकोल, गांगबल और भागसर झीलों को खतरे के प्रति ‘अत्यधिक संवेदनशील’ श्रेणी में पाया गया है।”

हालांकि, अब्दुल्ला ने कहा कि इस तरह का वर्गीकरण किसी आसन्न खतरे का संकेत नहीं देता है, बल्कि केवल विशिष्ट परिस्थितियों में ही विस्फोट की आशंका अधिक होने की तरफ इशारा करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आकलन संवेदनशीलता को समझने और भविष्य में विस्तृत अध्ययनों को प्राथमिकता देने के लिए एक आधार प्रदान करता है।

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