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हरियाणा में अब निजी बसों में भी मान्य होंगे फ्री पास, आयुक्त ने जारी किए आदेश, ऑपरेटरों ने जताया विरोध

VVinita Kohli
हरियाणा में अब निजी बसों में भी मान्य होंगे फ्री पास, आयुक्त ने जारी किए आदेश, ऑपरेटरों ने जताया विरोध
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चंडीगढ़: हरियाणा में यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए परिवहन आयुक्त कार्यालय ने आदेश जारी किए हैं कि अब राज्य की सभी निजी स्टेज कैरिज बसों में भी ‘फ्री’ और ‘कन्सेशनल’ पास मान्य होंगे। यह आदेश पूरे प्रदेश में तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है और इसके दायरे में करीब 1750 निजी बसें आएंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निजी बस संचालकों को हरियाणा रोडवेज की तर्ज पर सभी पात्र यात्रियों को यात्रा की सुविधा देनी होगी। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह सख्त फैसला लिया गया है।

मनमानी पर रोक के लिए सख्ती

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राज्य में लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि निजी बस संचालक छात्रों, बुजुर्गों और अन्य रियायती पास धारकों को बस में चढ़ने नहीं देते थे। कई मामलों में उनके साथ दुर्व्यवहार की भी शिकायतें सामने आई थीं। परिवहन विभाग ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सभी डीटीओ-सह-सचिवों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।

शिकायत के लिए खुला विकल्प

नए आदेश के तहत यदि कोई निजी बस संचालक पास होने के बावजूद किसी यात्री को बस में चढ़ने से रोकता है, तो यात्री संबंधित क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) कार्यालय या परिवहन विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज करा सकता है। इससे यात्रियों को अपने अधिकारों की रक्षा करने का सीधा माध्यम मिलेगा।

स्टेज कैरिज स्कीम 2016 का पालन जरूरी

परिवहन विभाग ने ‘स्टेज कैरिज स्कीम 2016’ की शर्तों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि यह नियम निजी बस संचालकों के परमिट की अनिवार्य शर्तों का हिस्सा हैं। वर्ष 2017 के आदेशों के बिंदु संख्या 11 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सभी संचालक कानूनी रूप से इन नियमों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने सब्सिडी से किया इनकार

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि इस सुविधा के बदले निजी बस संचालकों को किसी भी प्रकार की सब्सिडी या आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी। यह सेवा उनके परमिट का हिस्सा है और इसे लागू करना उनकी जिम्मेदारी है। इसी कारण से इस आदेश को लेकर निजी बस ऑपरेटरों में असंतोष देखा जा रहा है।

ऑपरेटरों ने जताया विरोध

स्टेट गैरिज ट्रांसपोर्ट सोसायटी एंड प्राइवेट बस ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के राज्य प्रधान डॉ. धन सिंह ने कहा कि जब तक सरकार भुगतान और प्रतिपूर्ति की स्पष्ट लिखित नीति नहीं बनाती, तब तक निजी बसों में इन पासों को लागू करना संभव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि रोडवेज को पास के बदले भुगतान मिलता है, जबकि निजी ऑपरेटरों को बिना मुआवजे के सेवा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

हाईकोर्ट के आदेश का भी असर

करीब सात महीने पहले हिसार कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर फैसला देते हुए कहा था कि जब तक हाईकोर्ट से कोई स्थगन आदेश नहीं आता, तब तक प्राइवेट बसों में भी सरकारी रियायती पास मान्य रहेंगे। यह आदेश लॉ छात्रा पूजा बिश्नोई की याचिका पर दिया गया था। फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका लंबित है और कोई स्टे ऑर्डर जारी नहीं हुआ है।

सख्त कार्रवाई की चेतावनी

परिवहन विभाग के सुपरिटेंडेंट बलजिंदर सिंह ने कहा कि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित में नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी और बस संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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