Ghazipur Kali temple: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर शहर के मिश्र बाजार में स्थित मां काली का मंदिर अपनी प्राचीनता, अद्भुत वास्तुकला और चमत्कारी कहानियों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। (Mishra Bazar Ghazipur temple) इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थापित मां काली की वह दुर्लभ प्रतिमा है, जिसमें देवी भगवान शिव के ऊपर खड़ी मुद्रा में नजर आती हैं।
मंदिर के मुख्य पुजारी गोपाल गोस्वामी के अनुसार, इस पावन स्थल पर मां की मुख्य प्रतिमा के अलावा सात पुरानी पिंडियां भी स्थापित हैं, जिन्हें स्थानीय लोग और श्रद्धालु माता की बहनें मानकर पूरी श्रद्धा के साथ पूजते हैं। नवरात्र के पावन दिनों में यहां सुबह से ही भक्तों के पहुंचने और अनुष्ठान करने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
प्रतिमा हटाने के असफल प्रयास और उससे जुड़ी जनश्रुतियां
इस मंदिर के इतिहास में करीब 35 साल पहले घटी एक घटना आज भी शहर में चर्चा का विषय बनी रहती है। पुजारियों और स्थानीय लोगों का दावा है कि उस समय इस प्राचीन प्रतिमा को हटाकर दूसरी जगह स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। (Maa Kali statue on Lord Shiva) कहा जाता है कि इसे हटाने के लिए पहले रस्सियों से खींचने की कोशिश की गई, लेकिन रस्सियां टूट गईं। इसके बाद क्रेन और चेन जैसे भारी उपकरणों की मदद भी ली गई, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मां काली की यह प्रतिमा अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिल सकी।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस घटना के बाद कई तरह की दंतकथाएं और लोक विश्वास जुड़े हुए हैं। हालांकि इस बात के कोई आधिकारिक प्रशासनिक दस्तावेज या स्वतंत्र प्रमाण मौजूद नहीं हैं, लेकिन बुजुर्गों का मानना है कि प्रतिमा को हटाने के विचार से जुड़े लोगों को बाद में कई तरह की अनहोनी का सामना करना पड़ा था। बाद में एक महिला को आए सपने और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर प्रतिमा की दिशा और पूजा-पद्धति को यथावत रखा गया।
सौ साल पुराना इतिहास और सात प्राचीन पिंडियों का रहस्य
मंदिर में मां काली की मुख्य प्रतिमा के साथ स्थापित सात पिंडियों का इतिहास भी बेहद पुराना माना जाता है। जानकारों के अनुसार, ये पिंडियां लगभग सौ साल पुरानी हैं और स्थानीय अधिवक्ता गिरीश चंद्र वर्मा के पूर्वजों द्वारा इनकी स्थापना कराई गई थी। (Gopal Goswami priest Ghazipur) हालांकि इनकी स्थापना के सटीक वर्ष और पुख्ता ऐतिहासिक दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन स्थानीय जनमानस में इन पिंडियों के प्रति अगाध श्रद्धा है।
नवरात्र के दिनों में सुबह पांच बजे मंदिर के पट खुलते ही महाआरती होती है और सुबह नौ बजे तक दर्शन का विशेष दौर चलता है। गाजीपुर का यह मंदिर आस्था, इतिहास और चमत्कारों का एक अनूठा संगम है, जो आज भी हर आने वाले को अपनी ओर आकर्षित करता है।
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