Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

गुरमीत राम रहीम पत्रकार की हत्या मामले में दोषी ठहराए जाने के सात साल बाद बरी

JJagmarg Desk
गुरमीत राम रहीम पत्रकार की हत्या मामले में दोषी ठहराए जाने के सात साल बाद बरी
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक पत्रकार की हत्या के 2002 के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। उच्च न्यायालय ने डेरा प्रमुख को इस मामले में एक विशेष सीबीआई अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के सात साल बाद बरी किया।

डेरा प्रमुख राम रहीम (58) अभी रोहतक की सुनारिया जेल में है। वह अपनी दो शिष्याओं के दुष्कर्म के जुर्म में 2017 में दी गयी 20 साल की जेल की सजा काट रहा है। मई 2024 में उच्च न्यायालय ने सीबीआई की विशेष अदालत के एक अन्य आदेश को पलट दिया था और 2002 में डेरा के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में राम रहीम और चार अन्य को बरी कर दिया था।

विज्ञापन

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को अक्टूबर 2002 में उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी, जब उनके अखबार ‘पूरा सच’ ने एक गुमनाम पत्र प्रकाशित किया था जिसमें सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में महिला अनुयायियों के कथित यौन शोषण का जिक्र किया गया था।

पत्रकार की बाद में मृत्यु हो गई थी और एक मामला दर्ज किया गया जिसमें राम रहीम को साजिशकर्ता के रूप में नामित किया गया। यह मामला 2006 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था। राम रहीम और तीन अन्य को जनवरी 2019 में पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने हरियाणा के सिरसा में पत्रकार की हत्या के मामले में दोषी ठहराया था। राम रहीम ने उच्च न्यायालय में सजा को चुनौती दी थी।

 डेरा प्रमुख के वकील जितेंद्र खुराना ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने शनिवार को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उन्हें (राम रहीम को) बरी कर दिया। बहरहाल पीठ ने मामले में तीन अन्य आरोपियों की सजा बरकरार रखी है।

इस मामले में विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है। पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति ने डेरा प्रमुख को बरी किए जाने के इस फैसले को अपने परिवार के लिए एक झटका बताया, जो एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रहा है और कहा कि वे इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगे।

उन्होंने कहा कि हमारे पास जो भी कानूनी उपाय हैं, हम उनका इस्तेमाल करेंगे। हम इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगे। हमें उम्मीद है कि जांच एजेंसी सीबीआई भी उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देगी।

बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ पहला आरोपपत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है और उनमें से किसी ने भी अपीलकर्ता का नाम साजिश में शामिल होने के रूप में नहीं लिया है। हालांकि, सीबीआई और मृत पत्रकार के परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने डेरा प्रमुख की याचिका का कड़ा विरोध किया। उच्च न्यायालय में बचाव पक्ष के वकील ने यह भी दावा किया कि इस मामले में बैलिस्टिक साक्ष्यों में विरोधाभास (असंगतियां) हैं।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मई 2024 में मामले की अधूरी जांच का हवाला देते हुए 2002 में डेरा के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में राम रहीम और चार अन्य को बरी कर दिया था। इससे पहले, सीबीआई की एक विशेष अदालत ने उन्हें इस मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने राम रहीम को सह-आरोपियों के साथ आपराधिक साजिश रचने का दोषी पाया था।

अतीत में सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) और कुछ अन्य सिख संगठनों ने राम रहीम को बार-बार दी जाने वाली पैरोल और फरलो पर आपत्ति जताई है, जिनमें से कुछ चुनावों के समय के आसपास दी गई थीं।

सिंह जनवरी में 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद 15 बार जेल से बाहर आया है। उसे 40 दिनों की पैरोल मिलने के बाद रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा किया गया था और इस अवधि के दौरान वह सिरसा स्थित अपने डेरा मुख्यालय में रहा।

पिछले साल अगस्त में भी उसे इसी तरह की पैरोल दी गई थी। पूर्व में कई मौकों पर जब सिंह जेल से बाहर आया, तो वह उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित डेरा के आश्रम में ही रहा। डेरा प्रमुख को सात फरवरी 2022 से तीन सप्ताह की फरलो भी दी गई थी, जो पंजाब विधानसभा चुनाव से महज दो हफ्ते पहले की बात है।

अक्टूबर 2024 में भी उसे 20 दिनों की पैरोल दी गई थी, जो हरियाणा विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले दी गयी थी। सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य राज्यों में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। हरियाणा में डेरा के अनुयायी कई जिलों में अच्छी-खासी संख्या में हैं, जिनमें सिरसा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल और हिसार शामिल हैं।

विज्ञापन

चंडीगढ़ की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।